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पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास

पर्यावरण सुरक्षा और पेड़ों को बचाने का निरंतर प्रयास कर रही है नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल। पर्यावरण को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए पेड़ों का क्या योगदान है इससे हर कोई वाकिफ है। विकास कार्यों के साथ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यह भी सुनिश्चित कर रही है कि विकास कार्यों के साथ पर्यावरण से किसी तरह का कोई समझौता न किया जाए।

पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास
पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास

बता दें कि दिल्ली-वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे को नोएडा, फरीदाबाद में गाजियाबाद से जोड़ने के लिए एक नया एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। यह एक्सप्रेसवे नोएडा में डीएनडी फ्लाईओवर से शुरू होकर सोना के केएमपी एक्सप्रेसवे तक कनेक्टेड रहेगा जहां दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे के एमपी को क्रॉस करेगा।

पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास
पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास

इस बात को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि फरीदाबाद भारत के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक है। सबसे प्रदूषित शहरों में से एक फरीदाबाद में पेड़ों को काटे जाने का विरोध भी हो रहा है। दरअसल बाईपास को दिल्ली, मुंबई एक्सप्रेस वे से जोड़ने के लिए बड़ी संख्या में हरे भरे पेड़ काटे जा रहे हैं। इसी के लिए सेव अरावली फाउंडेशन की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बात का संज्ञान भेजा गया है।

पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास
पर्यावरण सुरक्षा के लिए पीएम को लिखी गई चिट्ठी, पेड़ों को बचाने के लिए एनजीटी का अनोखा प्रयास

इस पत्र में पीएम मोदी से आवेदन किया गया है कि पेड़ों को ना काटा जाए बल्कि कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए कोई और अल्टरनेटिव ढूंढा जाए। बता दें पर्यावरण एक्टिविस्ट भी इसके लिए एनजीटी में याचिका दायर करने के लिए तैयार है। सेव अरावली संस्था के संस्थापक सदस्य जितेंद्र बड़ौदा का कहना है कि फरीदाबाद में बाईपास के किनारे 4000 से भी अधिक पेड़ों को काटा जा रहा है। प्रधानमंत्री समेत 18 अथॉरिटीज को लेटर लिखकर हस्तक्षेप की मांग भी की गई है।

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