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जगदीश चंद्र बोस की 162वीं जयंती पर उनकी प्रतिमा का अनावरण, बड़े बड़े दिग्गज रहे मौजूद

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् (एआईसीटीई) के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने आज महान वैज्ञाानिक जगदीश चंद्र बोस की 162वीं जयंती के उपलक्ष्य में जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद में जगदीश चंद्र बोस की प्रतिमा का अनावरण किया तथा विश्वविद्यालय परिसर में कौशल विकास सामुदायिक महाविद्यालय के भवन का उद्घाटन किया।


प्रो. सहस्रबुद्धे विश्वविद्यालय में इंटरनेट आफ थिंग्स पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन
के उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्ता थे। सम्मेलन में विज्ञान भारती (विभा) के राष्ट्रीय आयोजन सचिव श्री जयंत सहस्रबुद्धे विशिष्ट अतिथि रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. दिनेश कुमार द्वारा की गई। की। प्रो. सहस्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय में एआईसीटीई के सहयोग से स्थापित कौशल और व्यक्तित्व विकास केंद्र का भी उद्घाटन किया तथा विश्वविद्यालय परिसर में एक पौधा लगाया।

जगदीश चंद्र बोस की प्रतिमा को विज्ञान के लिए उनके योगदान के शिलालेख के साथ कुलपति सचिवालय के सामने स्थापित किया जा गया है। उल्लेखनीय है कि आधुनिक विज्ञान के क्षेत्र में जगदीश चंद्र बोस की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2018 में इस महान वैज्ञानिक के नाम पर विश्वविद्यालय का नाम रखा गया था। लगभग 3.75 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित कौशल विकास सामुदायिक महाविद्यालय के बहुमंजिला भवन का निर्माण 1600 वर्ग फुट के क्षेत्र में किया गया है, जिसमें 12 क्लासरूम, तीन लैब और एक कॉन्फ्रेंस हॉल शामिल हैं। यह भवन सामुदायिक महाविद्यालय के चल रहे पाठ्यक्रमों की आवश्यकता को पूरा करेगा, और इस भवन के भूतल पर सिविल इंजीनियरिंग की नई प्रयोगशालाएँ भी विकसित की जाएंगी।

इस अवसर पर बोलते हुए प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा कि कोलकाता में स्थापित बोस संस्थान जिसे बसु बिग्यान मंदिर के नाम से जाना जाता है, के बाद जे. सी. बोस विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का एकमात्र ऐसा संस्थान है, जिसे महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस के नाम पर रखा गया है। उन्होंने कहा कि इसका श्रेय राज्य सरकार और इस विश्वविद्यालय के प्रबंधन को जाता है।

उन्होंने कहा कि जगदीश चंद्र बोस अंतःविषय अनुसंधान शुरू करने वाले दुनिया के पहले शोधकर्ता थे जबकि आज हम अपनी नई शिक्षा नीति में अंतःविषय अनुसंधान पर बल देने की बात कर रहे है जो साबित करता है कि जे.सी. बोस अपने युग से कहीं आगे थे और कम से कम तीन नोबेल पुरस्कारों के हकदार थे लेकिन, दुर्भाग्य से उन्हें कभी नोबल पुरस्कार नहीं मिला। उन्होंने कहा कि महान भारतीय वैज्ञानिकों की जीवनी को पाठ्यक्रम का एक हिस्सा बनना चाहिए ताकि युवा पीढ़ी को जेसी बोस, एसएन बोस और सीवी रमन जैसे महान वैज्ञानिकों के बारे में पता चले न कि उन्हें केवल अन्य विदेशी वैज्ञानिकों की महानता के बारे में पढ़ाया जाए। विश्वविद्यालय के विस्तार की योजना पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा कि विश्वविद्यालय को अपने नए परिसर में मानविकी विषय के और अधिक पाठ्यक्रम शुरू करने चाहिए।

इससे पहले, प्रो. सहस्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय परिसर का भ्रमण किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा की गई पहल, विशेष रूप से विश्वविद्यालय द्वारा विकसित डिजिटल लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (डीएलएमएस) की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने ‘वन नेशन, वन डेटा’ की अवधारणा पर डेटा संग्रह के लिए एक काॅमन प्लेटफार्म विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों, विद्यार्थियों और उच्च शिक्षा के अन्य मापदंडों की जानकारी एकत्र करने के लिए देश में एक पोर्टल विकसित करने की आवश्यकता है, जिसके माध्यम से एआईसीटीई, एनबीए, यूजीसी, एनएएसी और टीईक्यूआईपी जैसी एजेंसियों को विभिन्न मापदंडों पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए डेटा उपलब्ध हो सके। उन्होंने एआईसीटीई के लिए डेटा प्रबंधन प्रणाली विकसित करने के लिए विश्वविद्यालय को अपनी विशेषज्ञता साझा करने का आग्रह किया।

टीचिंग व लर्निंग की गुणवत्ता में सुधार पर बल देते हुए प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा कि वर्तमान में उच्चतर शिक्षा में शिक्षकों के लिए केवल पीएचडी ही आवश्यकता है जबकि उनके पास कोई शैक्षणिक प्रशिक्षण नहीं होता जबकि कई बार तकनीकी शिक्षकों में विद्यार्थियों को कुशलता से प्रशिक्षित करने की क्षमता का अभाव देखने को मिलता है। इसलिए, एआईसीटीई ने आठ-मॉड्यूल का एक अनिवार्य शिक्षक प्रमाणन कार्यक्रम विकसित किया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही सभी इंजीनियरिंग शिक्षकों को इस कार्यक्रम से गुजरना पड़ सकता है और मौजूदा शिक्षकों के पदोन्नति के लिए प्रमाणन अनिवार्य होगा।

एआईसीटीई के विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा कि एआईसीटीई ने भारतीय ज्ञान प्रणाली के सभी पहलुओं पर अंतःविषय अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रभाग की स्थापना की है। एआईसीटीई जल्द ही स्वयं और एनपीटीईएल पर उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों का आठ अलग-अलग क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं में अनुवाद करवायेगा। वर्तमान में, ये पाठ्यक्रम केवल अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध हैं।

चैथी औद्योगिक क्रांति में एक महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी के रूप में इंटरनेट ऑफ थिंग्स की भूमिका का उल्लेख करते हुए प्रो. सहस्रबुद्धे ने कहा कि उभरती प्रौद्योगिकियों में नई नौकरियों का सृजन हो रहा है। इसलिए, युवाओं को नई तकनीकों को सीखने के लिए कड़ी मेहनत करनी होगी और आत्मनिर्भर भारत को सफल बनाने के लिए अपना योगदान देना होगा। उन्होंने एमएचआरडी के इनोवेशन सेल (एमआईसी), एआईसीटीई और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) द्वारा संयुक्त रूप से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर शुरू की गई ड्रग डिस्कवरी हैकथॉन का भी समर्थन किया और सभी तकनीकी संस्थानों से इस पहल में हिस्सा लेने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री. जयंत सहस्रबुद्धे ने मौलिक ज्ञान के निर्माण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हम विदेशों से प्रौद्योगिकी और मशीनरी आयात कर सकते हैं, लेकिन अंततः इन प्रौद्योगिकियों के निर्माण के पीछे मूल ज्ञान हमारा होना चाहिए। ज्ञान के निर्माण के बिना वास्तविक आत्म निर्भरता प्राप्त नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि वहीं देश दुनिया का नेतृत्व करेगा जोकि ज्ञान सृजन करेगा। जे.सी. बोस को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने कहा कि बोस सही मायने में अंतःविषय के महान वैज्ञानिक थे और विज्ञान के क्षेत्र में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पिछले पांच वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय में हुए विकास कार्यों के बारे में एआईसीटीई अध्यक्ष को अवगत कराया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में लगभग 4600 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं।

जल्द ही विश्वविद्यालय का विस्तार फरीदाबाद-गुरुग्राम मार्ग पर लगभग 20 एकड़ भूमि पर किया जाना है। नये परिसर के बनने के बाद विश्वविद्यालय की विद्यार्थी क्षमता को 15 हजार तक बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा जे.सी. बोस जयंती को कैलेंडर इवेंट बनाया जायेगा।
इससे पहले, प्लेसमेंट, एलुमनाई तथा कॉर्पोरेट मामलों के डीन प्रो. विक्रम सिंह ने कार्यक्रम का संक्षिप्त परिचय दिया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. एस.के गर्ग गर्ग, विभा के सचिव प्रवीण रामदास और डी.पी. भारद्वाज भी उपस्थित थे।

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