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Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक

हरियाणा और पंजाब के हजारों के साथ इन दिनों सरकार की नीतियों से चलते गतिरोध के कारण सड़कों पर उतरने को मजबूर हुए हैं। सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि अध्यादेश उनको वापस लेने पर निरंतर दबाव बनाते हुए अपनी मांग पर डटे हुए हैं। हरियाणा के अनेकों क्षेत्रों जैसे फरीदाबाद, पलवल, होडल, हथीन और बल्लभगढ़ के अनेकों किसान आंदोलन का हिस्सा बनते जा रहे हैं। देखते ही देखते यह आंदोलन प्रचंड रूप ले रहा है।

Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक
Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक

ऐसे में हरियाणा में भाजपा की सरकार बीजेपी और जेजेपी गठबंधन से चल रही है। जननायक जनता पार्टी दुष्यंत चौटाला किसानों के समर्थन में आवाज बुलंद करते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं उनकी पार्टी के 10 में से 7 विधायकों ने अन्य दाताओं के प्रदर्शन का समर्थन किया है। अन्य विपक्षी दलों की ओर से भी किसानों को अब खूब समर्थन मिल रहा है।

Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक
Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक

किसान प्रदर्शन का समर्थन करने वालों में अब नारनौल से जेजेपी विधायक राम कुमार गौतम भी शामिल हो गए हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तीनों कृषि बिलों को वापस लेने की अपील लगातार जारी है। इतना ही नहीं गौतम का मानना है कि किसान देश का अन्नदाता है बेटे सीमा पर रक्षा करते हैं और किसान खेत में हल जोत कर देश का पेट भरते हैं। ऐसे में किसानों के मुद्दों को बेहद संवेदनशील तरीके से संभालना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक
Kisan Andolan: खट्टर सरकार की बढ़ी मुश्किलें, किसानों के समर्थन में उतरे कई जजपा विधायक

बता दें कि बीते दिनों सरकार और किसान के बीच चलते गतिरोध के कारण टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर सील किए जा चुके हैं। अब पलवल, बल्लबगढ़, फरीदाबाद के रास्ते किसान यह रणनीति बना रहे हैं कि जल्द ही बदरपुर बॉर्डर को भी सील किया जाएगा। इतना ही नहीं किसानों का कहना है कि अगर कानूनों को वापस नहीं लिया गया तो यह आंदोलन जारी रहेगा और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन बरकरार रखा जाएगा।

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