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किसान आंदोलन में फसी एम्बुलेंस को नहीं मिली आगे जाने की इजाज़त, कॉल कर के मरीज का हो गया ऐसा हाल

भारत बंद के दौरान बाईपास पर किसानों द्वारा लगाए गए जाम में आम वाहनों के साथ एम्बुलेंस भी फास गए हैं। आंदोलन पर बैठे किसानों को जब भी एम्बुलेंस आती दिखी या फिर हूटर सुनाई दिया तब उन्होंने रास्ता खाली करवादिया।

साथ ही आंदोलनकारी किसान उन्हें रास्ता देकर आगे के लिए भी रवाना कर रहे थे। इस तरह किसानों ने जाम में फंसी 10 से ज्यादा एम्बुलेंस के लिए जाम को हटवाकर रास्ता बनवाया। वहीं बिना मरीज आई एक एम्बुलेंस को किसानों द्वारा बालौर चौक पर ही रोक लिया गया। चालक ने बार-बार गुहार लगाई कि वह मरीज को लेकर आएगा पर किसानों की एक ना सुनी।

एम्बुलेंस ड्राइवर ने किसानों को बार बार समझाया कि वह एक कॉल पर मरीज को लेने जा रहा है पर किसानों ने उसकी एक ना सुनी। अंत में एम्बुलेंस चालक को ही अपना रास्ता बदलना पड़ा और परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार को किसानों द्वारा बलौर चौक, नया गाँव चौक और जाखौड़ा मोड़ पर जाम लगाया गया।

जाम में फसे वाहनों को किसानों ने नहीं हटाया पर जैसे ही उन्होंने एम्बुलेंस की आवाज सुनी तो वह तुरंत रास्ता देने के लिए वहां से हट गए। आपको बता दें कि जाम लगाए बैठे किसानों को विशेष तौर से हिदायत मिली है कि किसी भी एम्बुलेंस को रोका ना जाए।

आपको बता दें कि पंजाब के मोघा से आए दूध को बर्फ बनाकर आंदोलन तक लाया गया है। 13 क्विंटल दूध आंदोलन में धरना दे रहे किसानों के लिए भिजवाया गया है ताकि लगातार गिरते पारे के बीच उनके खान पान में कोई कमी ना आए। दूध को बर्फ की तरह जमाकर बड़े बड़े वाहनों में टिकरी बॉर्डर तक पहुंचाया गया है ताकि वह खराब ना हो और पीने लायक बना रहे।

आपको बता दें कि किसान आंदोलन के समर्थन में पूरे देश को बंद करने की मांग रखी गई थी। मंगलवार को किसानों द्वारा भारत बंद करने का एलान किया गया था। बात की जाए हरियाणा पंजाब की तो दोनों राज्यों से भारत बंद के एलान को पुरजोर समर्थन मिला है।

ऐसे में केंद्र सरकार के ऊपर दबाव बना हुआ है कि कैसे किसानों के काफिले को नियंत्रण में लाया जाए ताकि बिमारी के इस दौर में संक्रमण पर अंकुश लगाया जा सके।

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