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खट्टर सरकार को आ गई हरियाणा के विकास की याद, तीन साल बाद अब दौड़ाएंगे दिमाग के घोड़े

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हरियाणा सरकार द्वारा साल 2017 में चिंतन शिवर का आयोजन किया गया था। चिंतन शिवर में हरियाणा सरकार में मौजूद तमाम आला कमान मंत्रियों ने शिरकत की थी। यह सियासी बैठक साल 2017 में हिमाचल प्रदेश के एक आलिशान होटल में हुई थी।

चिंतन शिवर के दौरान तमाम मंत्रियों ने हरियाणा के विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श किया था। साल 2020 में पुनः चिंतन शिवर का आयोजन होने जा रहा है। आपको बता दें कि इस बार यह शिवर चण्डीगढ़ के हरियाणा भवन में लगाया जाएगा। बताया जा रहा है कि महामारी के इस दौर में चिंतन शिवर की प्राथमिकता ग्रामीण व शहरों से जुड़ा विकास कार्य होगा।

खट्टर सरकार को आ गई हरियाणा के विकास की याद, तीन साल बाद अब दौड़ाएंगे दिमाग के घोड़े

संक्रमण के बढ़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए हरियाणा कार्य प्रणाली पूरी सुरक्षा और सावधानी के साथ इस शिवर का आयोजन करवाने वाली है। शिवर का आयोजन पूरे तीन दिन के लिए किया जाएगा जिसका नेतृत्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे।

खट्टर सरकार को आ गई हरियाणा के विकास की याद, तीन साल बाद अब दौड़ाएंगे दिमाग के घोड़े

खट्टर पूरे तीन दिन इस शिवर का हिस्सा होंगे जबकि उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला एक दिन के लिए शिवर में आकर अन्य मंत्रियों के साथ हरियाणा से जुड़ी नीतियों पर चिंतन करेंगे। बता दें कि यह चिंतन शिवर दिसंबर माह में आयोजित होने वाला है, 15 दिसंबर का दिन इसकी शुरुआत होगी।

खट्टर सरकार को आ गई हरियाणा के विकास की याद, तीन साल बाद अब दौड़ाएंगे दिमाग के घोड़े

कहा जा रहा है कि गृह मंत्री अनिल विज 16 दिसंबर को शिवर में शिरकत करने वाले हैं। पर उनकी तबियत को लेकर संशय बरकरार है जसिके चलते अभी उनके शिवर के हिस्सा होने की बात पर अभी आधिकारिक रूप से मोहर नहीं लग पाई है।

खट्टर सरकार को आ गई हरियाणा के विकास की याद, तीन साल बाद अब दौड़ाएंगे दिमाग के घोड़े

हरियाणा प्रदेश में विकास की गति को ध्यान में रखते हुए इस शिवर का आयोजन करवाया जा रहा है। ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दे अलग होंगे और शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को अलग रखा जाएगा। साथ ही साथ कयास लगाए जा रहे हैं कि इस साल लगने वाले चिंतन शिवर का अहम मुद्दा किसान आंदोलन होने वाला है।

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उपमुख्यमंत्री द्वारा बयान सामने आया था कि जल्द से जल्द वह सरकार से इस विषय पर बात करने वाले हैं। अगर सरकार किसानों की समस्या का निवारण नहीं कर पाई तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। ऐसे में अटकलें लगाईं जा रही हैं कि इस बार चिंतन शिवर में तनातनी हो सकती है।

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