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बदल रहा मौसम का मिजाज, रखें रखें अपना और अपने बच्चों की सेहत का ख़ास ख्याल

दिसंबर और जनवरी साल के सबसे सर्द महीनें माने जाते हैं। हालांकि दिसंबर के शुरुवाती दिनों में ठंड का ख़ासा प्रकोप नहीं महसूस किया गया पर अब जैसे जैसे दिन बीते रहे हैं, मौसम का मिजाज बदलता जा रहा है। जिले में कई दिनों बाद शुक्रवार के दिन दिसंबर की ठंड जैसा एहसास शहरवासियों को हुआ। दोपहर तक आसमान में काले बादलों की घटा छायी रही जिससे संभावना यह जताई जा रही है कि जल्द ही मौसम की पहली बरसात शहर में शीतलहर ले कर आएगी।

पंजाब और हरियाणा में बारिश की भारी संभावना के बीच एक बार फिर सेहत का ख़ास ख्याल रखने की ज़रुरत बढ़ गयी है। मौसम ने करवट ली है जिसका लुत्फ़ सभी शहरवासी भरपूर तरीके से उठा रहे हैं। इस बीच बच्चों की सेहत का ख़ास ध्यान रखना अनिवार्य है। बदलते मौसम के साथ बच्चों एवं बड़ों में खांसी, जुखाम और बुखार के लक्षण दिखने लगे हैं। इतना ही नहीं, कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा भी सर्दियों के महीनों में अपने चरम पर है।

मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए स्वस्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को एहतियात बरतने और सावधान रहने के लिए ख़ास दिशा निर्देश दिए हैं। बदलते समय में सेहत का ख़ास ख्याल और गरम कपडे पहनने पर जोर देना अति आवश्यक है।

लापरवाही बरती गयी तो अंजाम घातक हो सकता है। जिला नागरिक अस्पताल के प्रशासक डॉ. राजेश धीमान के अनुसार बादशाह खान अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 1500 के मरीज़ आते हैं। पर मौसम में अचानक आये बदलाव से मरीजों की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है जो कि चिंताजनक है।

विशेषज्ञों की मानें तो सर्दी के महीनों में हर वर्ग के लोगों के लिए सूर्य की किरणें राम बाण औषधि का काम करती हैं। बच्चों, बूढ़ों और मरीजों की सूर्य की किरणों के स्नान करना चाहिए। सूर्य की किरणों में रोग प्रतिकारन शक्ति होती है जो शरीर को बाहरी बैक्टीरिया और इन्फेक्शन फैलाने वाले वायरस से लड़ने की क्षमता प्रदान करती हैं। इतना ही नहीं, गरम कपड़े पहनने में कोई कमी नहीं हो इसका भी ख्याल रखा जाए।

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