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कूड़े से उठा कर गरीब किसान ने लगाया था गले, 25 साल बाद चुकाया कुछ ऐसे एहसान

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ऐसा कहा जाता है कि भारत देश किसान और जवान के कंधो के बल पर ही टिका हुआ है। इसलिए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने “जय जवान जय किसान” का नारा भी दिया था।

कुछ ऐसी ही कहानी बताने जा रहे है जिसे सुनने के बाद आप भी एक किसान की तारीफ करेंगे। दरअसल एक किसान ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जो अच्छे अच्छे से नहीं हो पाता। जी हां एक किसान ने ऐसा काम किया जिसका नतीजा उसे 25 साल बाद मिला।

कूड़े से उठा कर गरीब किसान ने लगाया था गले, 25 साल बाद चुकाया कुछ ऐसे एहसान

आप सभी को पता है कि किसान की स्थिति बेहद खराब होती चली जा रही है। किसान अपने परिवार का भरण पोषण बड़े ही दिक्कतों में कर पाते है। ऐसे में जब किसान ऐसा काम कर देते तो क्या कहना। आपको बता दे कि किसान के इस काम की हर जगह चर्चा और तारीफ हो रही हैं।

क्योंकि इस काम को करना हर किसी के बस में नहीं है। चलिए आपको पूरा वाक्या बता देते है। सोबरन नामक किसान ठेले पर सब्जी बेचकर अपना गुजारा किया करता था। लेकिन उसने आज अपनी बेटी को पढ़ा-लिखाकर लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करवा दी है। उसकी बेटी को इस परीक्षा में पास होकर पोस्टिंग भी मिल चुकी है।

वहीं सोबरन ने मीडिया को बताया कि जब वह 30 साल का था तब वो सब्जी बेचा करता था। तभी उसे कूड़े से एक लड़की की रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर सोबरन उस बच्ची के पास चला गया और उसे उठाकर गले से लगा लिया।

ये भी बता दे कि उस समय सोबरन की शादी भी नहीं हुई थी फिर उसने शादी नहीं करने का फैसला लिया। इसके बाद उसने लड़की का नाम ज्योति रखा। उसे पाल पोसकर बड़ा किया। ज्योति ने 2013 में कंप्यूटर साइंस से ग्रेजुएशन की। इसके बाद ज्योति ने लोक सेवा आयोग की कठिन परीक्षा भी पास कर ली। 25 साल की ज्योति ने यह साबित कर दिया की कूड़े से उठाकर उसके पापा ने कोई भी गलती नहीं की है।

उसके पिता ने जो किया वह ठीक किया। वहीं सोबरन ने आगे कहा कि 25 साल की ज्योति ने यह साबित कर दिया की उसे उस दिन लड़की नहीं बल्कि हीरा मिला था जो आज बुढ़ापे की लाठी बन चुकी है।

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