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शौचालयों की दीवारों पर चमक रहे हैं जाले, सड़क किनारे हलके होने को मजबूर हुए फरीदाबाद वासी

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” स्वच्छ भारत ” महात्मा गांधी का सपना था, जो अब जुमला मात्र प्रतीत हो रहा है। स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में साफ़ सफाई के नाम पर किसी भी प्रकार की सक्रियता देखने को नहीं मिली। हर जगह कूड़े का अम्बार देखने के लिए मिल जाता है। नगर निगम की लापरवाही किसी से भी नहीं छिपी है। हर कोई निगम प्रणाली द्वारा बरती जाने वाली लापरवाही का साक्षी है।

फरीदाबाद में साफ़ सफाई की ओर कोई देख रेख नहीं की जा रही है। सड़कों के आस पास तो गंदगी का ढेर लगा ही हुआ है पर क्षेत्र में मौजूद कई शौचालय भी इस समय जर्जर अवस्था में हैं। क्षेत्र में मौजूद सार्वजनिक रूप से लोगों के इस्तेमाल के लिए बनाए जाने वाले शौचालय खराब अवस्था में हैं।

शौचालयों की दीवारों पर चमक रहे हैं जाले, सड़क किनारे हलके होने को मजबूर हुए फरीदाबाद वासी

सरकार ने हमेशा की तरह वादे तो किए लेकिन यह वादा बी और वादों के तरह खोकले निकले। अब तो यह अभियान भी सरकार का एक जुमला ही प्रतीत होता है। स्वछ भारत अभियान की मुहिम प्रधान मंत्री ने 5 वर्ष पहले ही शुरू कर दी थी पर आज भी हमारे शहर में की स्तिथि में कोई सुधार नही आया।

शौचालयों की दीवारों पर चमक रहे हैं जाले, सड़क किनारे हलके होने को मजबूर हुए फरीदाबाद वासी

गाँधी जयंति के अवसर पे स्वछता के नारे तो सब देते हैं लेकिन जब विकास की बात करो तो सरकारी कर्मचारी इसपे चुप ही नज़र आते है। अभियान में कई उद्देश्य शामिल किए गए थे। जिसमें से सबसे अहम उद्देश्य हर किसीको शौचालय का सुविधा उपलब्ध करा के खुले में शौच को पूरी तरह ख़तम करना।

शौचालयों की दीवारों पर चमक रहे हैं जाले, सड़क किनारे हलके होने को मजबूर हुए फरीदाबाद वासी

सरकार ने 5वर्ष पहले यह मुहिम की शुरुआत की थी लेकिन आज भी स्तिथि में कोई सुधार नही दिखता। इसका सबसे बड़ा उदाहरण हमे सेक्टर 9 के मार्केट के एक सौचालय में दिखा। सौचालय 3वर्ष पूर्व ही बना दिया गया था लेकिन उनमें कोई भी सेवाओ का प्रावधान नही हैं।

ना पानी की सुविधा तो ना ही सिवेज सिस्टम का कोई प्रावधान है। क्या हमारी सरकार का स्वच्छ भारत अभियान यह ही हैं? या ऐसा कहे यह भी एक महज जुमला ही है।

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