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किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल

पंजाब और हरियाणा के हजारों किसान दिसंबर के महीने की सर्द रातें दिल्ली की सड़कों पर गुजारने को मजबूर हैं। किसानों का मानना है कि सरकार द्वारा पारित कृषि अध्यादेश किसानों के हित में नहीं बल्कि अंबानी और अडानी जैसे पूंजीपतियों की जेबें भरने वाले हैं। इसी के चलते किसान अपनी एकता, दृढ़ विश्वास, संकल्प और जज्बे के बलबूते सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल
किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल

एक तरफ किसान अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं और दूसरी तरफ खेतों में फसल बुआई का समय हो चला है। बता दें कि गाजर की फसल की बुआई करने वाले किसानों को अब अपनी फसल को लेकर भय सताने लगा है। इन दिनों फरीदाबाद के अलावा दिल्ली के व्यापारी फसल की खरीदारी करने के लिए किसानों से संपर्क करते थे पर इस बार ऐसा नहीं है।

किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल
किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल

पहले महामारी के दौर में आर्थिक मंदी की मार झेलनी पड़ी और अब आंदोलन के चलते इस बार व्यापारी भी सुस्त दिखाई दे रहे हैं। सर्दियों में गाजर की फसल खूब बिकती है पर अब गाजर की फसल की बुआई करने वाले किसानों का कहना है की देहात में इन दिनों दिल्ली में फरीदाबाद के व्यापारी आ जाते थे जो इस बार नहीं आए हैं।

किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल
किसानों के साथ उनकी फसलें भी चढ़ रहीं आंदोलन की भेंट, सीजन की सब्जियां बेचना भी हो रहा मुश्किल

अन्य दिनों में किसानों को फसल के अच्छे दाम मिलते थे पर इस बार किसानों को मुनाफे और कमाई की कोई उम्मीद नहीं है। बदरोला के किसान रामवीर का कहना है कि इस बार महामारी के कारण आर्थिक मंदी झेलनी पड़ी और अब आंदोलन के कारण गाजर की फसल के भी दाम ना मिलने से काफी क्षति पहुंची है।

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