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अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020: कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित ‘‘सतत् अस्तित्व और श्रीमद्भगवद्गीता दर्शन’’ वेबिनार

हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य ने कहा कि भगवान् श्री कृष्ण द्वारा कुरूक्षेत्र में दिया गया गीता का दिव्य संदेश निष्काम कर्म का एक ऐसा दर्शन है, जो राष्ट्र, समाज व प्राणी मात्र के कल्याण और उन्नति का आधार है। यह सन्देश आज भी प्रासंगिक है। श्री आर्य सोमवार को अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020 के उद्घाटन अवसर पर कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय में आयोजित ‘‘सतत् अस्तित्व और श्रीमद्भगवद्गीता दर्शन’’ वेबिनार को वर्चुयल रूप से सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने राजभवन से ही जुड़कर अपना वर्चुयल सम्बोधन दिया।

ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर पर मंत्रौच्चारण और शंखनाद के बीच अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020 की भव्य शुरूआत की गई। इस मौके पर हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर, सांसद नायब सिंह सैनी, विधायक सुभाष सुधा, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद, स्वामी शंकराचार्य, लोकेश मुनि ने ब्रह्मसरोवर के पवित्र जल का आचमन कर पवित्र ग्रंथ गीता का पूजन करते हुए अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020 का शुभारम्भ किया।

वेबिनार से जुड़ते हुए राज्यपाल ने कहा कि गंगा के जल से तो मुक्ति प्राप्त होती है, वाराणसी की भूमि और जल में मोक्ष देने की शक्ति है, परन्तु कुरूक्षेत्र के जल, थल और वायु-तीनों ही मुक्ति प्रदता हैं। उन्होंने कहा कि इस बार गीता महोत्सव ऑनलाईन मनाया जा रहा है, इसलिए न केवल भारत से ही बल्कि विदेशों से भी लाखों-करोड़ों की संख्या में लोग कार्यक्रम से जुड़कर महोत्सव का आनन्द ले रहे है। उन्होंने इस महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय स्तर प्रदान करने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल की प्रशंसा की। उन्होंने श्रद्धालुओं को हार्दिक बधाई दी और नववर्ष की खुशहाली की कामना की।

इस वेबिनार में मुख्य अतिथि के रूप मे बोलते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पवित्र ग्रंथ गीता के संदेश आज भी पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक और तर्कसंगत है। कुरूक्षेत्र की पावन धरा पर भगवान श्रीकृष्ण ने सदियों पहले गीता के उपदेश देकर पूरे विश्व को कर्म करने का संदेश दिया। आज पवित्र ग्रंथ गीता के उपदेशों को अपने जीवन में धारण करने की जरुरत है। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव से धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र की पहचान पूरे विश्व में बनी है।

उन्होंने कहा कि आज प्रगति और आधुनिकता की इस दौड़ में हम अपने इतिहास, संस्कृति और संस्कारों को भूलते जा रहे है। इस प्रकार के महोत्सवों से हमें अपने इतिहास और संस्कृति से आत्मसात करने का

अवसर मिलता है और संस्कारों और शिक्षा की भी मिलती है। इसलिए हमें इन महोत्सवों से मिलनी वाली शिक्षा और संस्कारों को ग्रहण करना चाहिए। वेबिनार में पर्यटन एवं शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर, कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ0 सोमनाथ सचदेवा, स्वामी ज्ञानानन्द जी महाराज, शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानन्द तीर्थ जी महाराज, श्री लोकेशमुनि जी, मुलाना काकु जी ने भी श्रीमद्भगवद्गीता के विभिन्न पहलुओं पर विचार प्रकट किए।

अन्तर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव-2020 की नोडल अधिकारी व केडीबी की सदस्या सचिव डा0 जी. अनुपमा ने आगामी 25 दिसम्बर तक होने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया और उन्होंने कहा कि कोविड-19 के कारण महोत्सव के कार्यक्रमों का वर्चुअल, आनलाईन और सोशल मीडिया की विभिन्न माध्यमों से सीधा प्रसारण किया जा रहा है, इसलिए लोग घर बैठे ही इन कार्यक्रमों का आनंद ले सकते हैं।

इस अवसर पर सांसद नायब सिंह सैनी, विधायक सुभाष सुधा, उपायुक्त शरणदीप कौर बराड़, पूर्व विधायक डा. पवन सैनी, जिला प्रशासन व कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के अधिकारी व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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