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चौथी पास युवक ने परिवार को बनाया अधिकारियो का घराना, एक घर से ही IAS, IPS समेत 11 अफ़सर

कहते हैं कि पढ़ाई लिखाई बेहद जरूरी होती है। बिना पढ़े कुछ नहीं होता। आपको अपने भविष्य को चमकाना है तो आपको पढ़ना बहुत जरूरी है। तभी आप आगे बढ़ सकेंगे।

शिक्षा ही आपका ज्ञान होता है और ऐसा ज्ञान है जो आपसे इसे कोई छीन नहीं सकता। सबसे बड़ी बात है कि इस ज्ञान को आप जितना बांटोगे उतना ही यह बढ़ता है। इस ज्ञान को कोई चुरा नहीं सकता। लेकिन कई बार सोचने में बड़ा अजीब सा लगता है कि जो इंसान नामचारे के पढ़ा हो।

सिर्फ चौथी क्लास तक ही पढ़ा हो, कम से कम पढ़ा हो तो वो अपनी आने वाली पीढ़ी को अपने परिवार के हर एक बच्चे को अच्छी शिक्षा दीक्षा देता है और आईएएस आईपीएस अफसर तक बना देता है। ये तमाम बातें अपने आप में बिल्कुल चौंकाने वाली हैं, और साथ ही साथ एक उदाहरण पेश करने वाली भी हैं। यह बिल्कुल गलत है कि अगर आप पढ़े नहीं है तो आप अपनी आने वाली जनरेशन को भी ना पढ़ाएं।

अगर आप पढ़े ही नहीं है तो आपकी ना के बराबर एजुकेशन आपकी शिक्षा आपके मुताबिक ना चले, ये भी ज़रूरी नहीं, क्योंकि ज्ञान बहुत जरूरी है। और ज्ञान पढ़े-लिखे व्यक्ति में ही हो यह इतना जरूरी नहीं है। पढ़े-लिखे भी कई बार अज्ञानी होते हैं। लेकिन जो पढ़-लिखकर आगे बढ़ता है भविष्य बनाता है। अपनों की परवरिश करता है और शिक्षा का क्या औहदा है, जीवन में इस बारे में जो जानता है तो उससे बड़ा परिपूर्ण ज्ञानी व्यक्ति कोई नहीं हो सकता।

हम आपको बताने जा रहे हैं। ये बहुत रोचक कहानी है जिसे सुनकर, जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे और आपको सुकून जरूर पहुंचेगा। अकेले बसंत सिंह के परिवार ने देश को दो IAS, एक IPS समेत 11 क्लास वन असफ़र हैं। कहा जाता है कि कम पढ़े-लिखे बसंत की दोस्ती हमेशा बड़े अफसरों से रही। उन्होंने ये सब देखते हुए अपने बच्चों को शिक्षा दी और इस तरह के नक़्शे कदम पर चलने के लिए प्रेरित किया। बसंत सिंह के बेटे-बेटी, बहु और पोती भी अफ़सर हैं। उनके चारों बेटे क्लास वन के अफ़सर हैं, जबकि बहु और पोता आईएएस हैं। इसके साथ, उनकी पोती आईपीएस है, तो एक आईआरएस अफसर है।

तो ये है भारत में एक ऐसा परिवार। इस परिवार में IAS और IPS समेत 11 फर्स्ट क्लास अफसर मौजूद हैं। मूल रूप से ये परिवार हरियाणा के जींद जिले के गांव डूमरखां कलां का है। इन सभी की सफलता का बड़ा क्रेडिट जाता है चौधरी बसंत सिंह को। जब तक इस तरह की सोच के लोग ज़मी पर पैदा होते रहेंगे तब तक शिक्षा-दीक्षा की कहानी ऐसे ही बढ़ती रहेगी।

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