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क्या है शिक्षा विभाग के बड़े फैसले ?फालतू फीस नहीं ले पाएंगे ,ऑनलाइन क्लासेस की भी जानकारी मांगी ।

कोरोना ने जैसे ही भारत में दस्तक दी तो सबसे पहले स्कूल और कॉलेजेस को बंद करने के आदेश आएं क्योंकि स्कूल और कॉलेज इसमें पढ़ने वाले देश के युवा ही देश का भविष्य है। इस महामारी के दौरान स्कूल खोलने के लिए अभी समय है और ऑनलाइन पर ही एकेडमिक सत्र निर्भर है।

क्या है शिक्षा विभाग के बड़े फैसले ?फालतू फीस नहीं ले पाएंगे ,ऑनलाइन क्लासेस की भी जानकारी मांगी ।

इसलिए शिक्षा निदेशालय प्रदेश के सभी जिलों से रिपोर्ट एकत्रित कर रहा है इसी के साथ हर जिले से ये भी रिपोर्ट ली जा रही है कि निजी विद्यालयों की फीस किसी भी तरह बढ़ी ना हो ।

इन रिपोर्ट से ये पता चलता है कि लॉक डाउन के दौरान कहीं शिक्षा पर तो प्रभाव नहीं पढ़ रहा और किस तरह बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे हैं हर जिले को अपनी अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द पहुंचानी है ।

ऐसे में विभाग ने एक परफॉर्मा जारी किया है जिससे हर जिले की रिपोर्ट को देखने और जानने के बाद आगे के बड़े फैसले पढ़ाई से जुड़े हुए लिए जाएंगे।

ये भी पता चलेगा की किस के पास फोन ,लैपटॉप और कंप्यूटर है ।

ऑनलाइन शिक्षा के तहत छात्रों को पढ़ने के लिए फोन इंटरनेट लैपटॉप और कंप्यूटर की आवश्यकता अधिक होती है ऐसे में इस बात का भी डाटा दिया जाएगा कि किन-किन बच्चों तक यह सुविधाएं है। निदेशालय ने सभी जिले को यह आदेश दिए हैं कि सभी अपनी रिपोर्ट दें और अपने अपने जिले में कितनी सुविधा उपलब्ध है इस बात की पुष्टि करें ।

ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे छात्रों की जानकारी के लिए शिक्षा निदेशालय की ओर से एक परफॉर्मा भी भेजा गया है । जिसमें 6 कॉलम बनाए गए हैं पहले कॉलम में क्लस्टर में छात्रों की संख्या, दूसरे में फीचर फोन या सिंपल फोन वाले छात्रों की संख्या, तीसरे कॉलम में स्मार्टफोन वाले छात्रों की संख्या, चौथे कॉलम में कंप्यूटर व लैपटॉप वाले छात्रों की संख्या, पांचवे कॉलम में टेलीविजन के साथ केवल वाले छात्रों की संख्या, छठे और आखिरी कॉलम में डीटीएच की सुविधा वाले छात्रों की संख्या भरनी होगी ।

क्या है शिक्षा विभाग के बड़े फैसले ?फालतू फीस नहीं ले पाएंगे ,ऑनलाइन क्लासेस की भी जानकारी मांगी ।

सरकार बच्चों की शिक्षा के लिए हर मुमकिन कदम उठा रही है इसी के साथ-साथ बच्चों के माता-पिता पर भी लॉक डाउन में होने वाली परेशानी को समझते हुए भी किसी भी निजी स्कूल से फीस बढ़ाने की प्रक्रिया पर भी रोक लगाई जा रही है यह केवल 1 जिले में नहीं बल्कि पूरे हरियाणा प्रदेश में इस बात को गंभीर रूप से लिया जा रहा है।

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