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किसानों के आक्रोश का शिकार हुए बाबा रामदेव, पतंजलि प्रोडक्ट्स का होगा पूर्ण बहिष्कार

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित कृषि अध्यादेशों पर किसानों का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है। किसानों का मानना है कि सरकार द्वारा प्रस्तावित तीनों कृषि अध्यादेश किसानों के हित में नहीं बल्कि बड़े-बड़े अम्बानी और अडानी जैसे उद्योगपतियों की जेबें भरने वाले हैं।

इसी के चलते किसानों की मांग है कि सरकार तीनों कृषि अध्यादेश वापिस ले और अपनी इसी मांग पर डटे किसान इन दिनों दिसंबर के महीने की सर्द रातें दिल्ली की सीमाओं पर बिताने को मजबूर हैं। किसान अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे हैं और इसमें वे अकेले नहीं हैं।

अनेकों सामाजिक संगठनों, स्टूडेंट यूनियन और राजनैतिक दल किसानों के समर्थन में उत्तर चुके हैं। इतना ही नहीं, किसानों के हक़ के लिए बॉलीवुड के फिल्मी सितारों के बीच भी संग्राम छिड़ गया। हर तरफ से बेतहाशा समर्थन के बाद किसानों के हौसलें और बुलंद होते चले गए और किसान और सरकार के बीच टकराव और गतिरोध की स्थिति बनती और बढ़ती चली गयी।

हालाँकि सरकार द्वारा किसानों को मानाने और समझाने-बुझाने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। इतना ही नहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजीपी) के वरिष्ठ नेता किसानों के प्रतिनिधिओं से कई बार वार्ता कर चुके हैं जो बेनतीजा रहीं। सरकार का कहना है कि कृषि कानूनों में हर संभव संशोधन के लिए कोई हर्ज़ नहीं पर बात-चीत करके मसले का हल निकल पाना आसान नहीं लग रहा।

भारतीय जनता पार्टी (बीजीपी) पार्टी के नेताओं का कहना है कि किसानों को बर्गलाया गया है और इसमें विपक्षी दाल के नेताओं की हैं भूमिका है। वहीँ दूसरी ओर, किसान एक के बाद एक नयी रणनीति बना कर सरकार पर दबाव बनाने और बिल वापसी के लिए एड़ी-छोटी का ज़ोर लगा रहे हैं। इसी बीच अब बाबा रामदेव और उनके ब्रांड पतंजलि के प्रोडक्ट्स भी आंदोलन की भेंट चढ़ने वाले हैं।

भारतीय किसान यूनियन, हरियाणा के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चूढ़नी ने पतंजलि के प्रोडक्ट्स का बहिष्कार करने का एलान किया है। चूढ़नी का कहना है कि अम्बानी की जिओ सिम और मोबाइल फ़ोन के साथ बाबा रामदेव के पतंजलि का भी पूर्ण बहिष्कार करना ज़रूरी हो गया है।

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