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फरीदाबाद पुलिस की बर्बरता की हद, पूछताछ के नाम पर बेल्ट और लात-घूंसों से पीटा

पुलिस की बर्बरता और ज्यात्ति की ख़बरें कोई नयी बात नहीं हैं। आये दिन देश में पुलिस की आरोपियों के साथ बर्बरता के किस्से सुनने को मिलते हैं। हरियाणा के गुरुग्राम में छह पुलिसकर्मियों के बीच से धोखाधड़ी के आरोपी को साथी द्वारा छुड़ा ले जाने से फरीदाबाद पुलिस का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया। पुलिस कर्मियों का गुस्सा इतना भड़का कि पुलिस ने अपना गुस्सा आरोपी के परिवार पर निकाला।

मामले में आरोपी शंकर का पता लगाने के लिए पुलिस ने मानवता की सभी हदें पार कर दी। परिवार का आरोप है कि शंकर के बारे में पूछताछ करने के नाम पर उसकी भाभी, बहन और जीजा को बेल्ट, लात-घूंसों और डंडों से पीटा गया। भाभी नयनतारा का कहना है कि दरवाजे पर खटकने की आवाज़ सुनी और दरवाजा खोला तो महिला पुलिसकर्मी ने बिना कुछ बात किए उन्हें पीटना शुरू कर दिया। भाभी का यह भी आरोप है कि ननंद आशा को भी पनिरीक्षक राजेश ने आशा को लातों से मारा था जिसके बाद शंकर के परिवार वाले काफी डरे और सहमे हुए थे।

इतना ही नहीं, एक महिला व एक पुरुष पुलिसकर्मी रात भर उनके घर पर डेरा जमाए रहे। उनके मोबाइल को भी अपने कब्जे में ले लिया। घर में लकवाग्रस्त पड़े उनके ससुर व 11 साल के बच्चे के सामने उन दोनों को बुरी तरह से पीटा गया। पुलिस की बर्बरता यहीं खत्म नहीं हुई। आशा को घर छोड़कर चेतावनी दी गई कि वह शंकर से संपर्क करे और उसे अपने साथी राहुल के साथ हर हाल में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए दबाव बनाए। ऐसा न करने पर उसे भी थाने ले जाकर टॉर्चर करने की धमकी दी थी।

पुलिस से घर पर ही मार खा चुकी आशा के उस वक्त आंसू निकल गए थे जब शुक्रवार शाम को उसकी भाभी और जीजा पुलिस हिरासत से वापस घर लौटे। उनके शरीर पर बने डंडों, बेल्ट के निशान देखकर वह अपने आप को रोने से नहीं रोक पाई। एक आरोपी के परिवार के साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

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