Pehchan Faridabad
Know Your City

अलविदा 2020 : संक्रमण के दौर में भी खूब रंग लाई हरियाणा में राजनीति की रणनीति ,एक नजर इस पर भी

हरियाणा : महज दो दिन बाद जहां नववर्ष की शुरुआत होने को है। वही आने वाला समय बीते हुए साल से बहुत से बहुत ज्यादा बेहतर हो इसके लिए लोगों के मुंह से सिर्फ एक ही दुआ निकल रही है कि जल्द से जल्द यह संक्रमण खत्म हो जाए और आने वाला साल लोगों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आए।

आप यह सोचेंगे कि बीते हुए वर्ष में केवल कोरोना वायरस या फिर लॉकडाउन जैसे अल्फाज से ही पूरा वर्ष गुजर गया। परंतु ऐसा नहीं है बीते हुए वर्ष में कई ऐसे राजनीतिक खेल और किससे कहानियां घटित हुई जिसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।

यह साल जहां पूरे दुनिया के लिए एक संक्रमण का कहर लेकर आया तो वही देश भर के अन्नदाता ओं के लिए दुखों का पहाड़ लेकर आया है। इसी पहाड़ करें और आंदोलन के बैनर तले सैकड़ों किसान अभी भी अपनी न्याय की मांग करते हुए दिल्ली हरियाणा बॉर्डर पर जत्था लगाएं सरकार से गुहार लगा रहे हैं।

इतना ही नहीं इस साल तो राजनीति के गलियारों में लव जिहाद के मुद्दे को भी जोरों शोरों से उठाया गया। कोरोना वैक्सीन के ट्रायल में खुद हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने अपनी जान तक छोड़ दें और प्रशिक्षण के लिए खुद को आगे करके संक्रमण को न्योता दे दिया।

वहीं केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू होने से कुछ महीने पहले ही विपक्षी कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल ने राज्य में किसानों के मुद्दों को उठाना शुरू कर दिया था। दोनों दलों ने गेहूं खरीद में कथित कुप्रबंधन के बारे में शिकायत की और नई फसल विविधता योजना की आलोचना की।

जब नए कृषि कानूनों का विरोध तेज हुआ तो इसकी तपिश भाजपा नीत गठबंधन में सहयोगी जननायक जनता पार्टी (जजपा) ने भी महसूस की।

विपक्ष ने नई पार्टी पर सत्ता में बने रहने के लिए किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। जजपा के 10 में से कम से कम आधे विधायकों ने प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में बयान दिए जो गठबंधन के इस आधिकारिक रुख से अलग है कि ये कानून किसानों के भले के लिए हैं। किसानों ने जजपा नेता एवं उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के निर्वाचन क्षेत्र उचाना में अस्थायी हेलीपेड को भी खोद दिया जहां उनका हेलीकॉप्टर उतरना था।

बहरहाल, चौटाला को मानना पड़ा कि कानून में संशोधन की जरूरत है और कहा कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रणाली को खत्म किया जाता है तो वह सरकार से इस्तीफा दे देंगे। इस साल के शुरू में भाजपा-जजपा सरकार एक विधेयक लेकर आई जिसमें निजी क्षेत्र की नौकरियों में राज्य के लोगों को 75 प्रतिशत आरक्षण देना का प्रावधान है।

यह आरक्षण 50,000 रुपये प्रति माह से कम वेतन वाली नौकरियों पर लागू होगा। इसके अलावा, विधानसभा ने एक और विधेयक पारित किया जो ग्रामीण मतदाताओं को यह अधिकार देने का प्रस्ताव करता है कि अगर सरपंच और पंचायत के अन्य सदस्य अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं तो उनका कार्यकाल कम कर दिया जाए।

साथ में पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण देने का नया कानून लाया गया। वहीं, वल्लभगढ़ में 21 वर्षीय कॉलेज छात्रा की हत्या का दृश्य कैमरे में कैद होने के बाद हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज ने “लव जिहाद“ को रोकने के लिए कानून लाने के वास्ते कड़ी टिप्पणियां की।

इस साल के शुरू में अपराध जांच विभाग (सीआईडी) को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और विज के बीच विवाद हो गया। आम तौर पर माना जाता है कि सीआईडी पुलिस विभाग के तहत आती है जो गृह मंत्री के तहत होती है। लेकिन खट्टर ने सीआईडी को अपने अधीन रख लिया था।

इस साल विज कोविड के संभावित टीके “कोवैक्सीन“ के परीक्षण के लिए स्वेच्छा से आगे आए। लेकिन टीके की पहली खुराक लगने के कुछ दिनों बाद वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए।

गुड़गांव की 29 वर्षीय महिला राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाली पहली व्यक्ति थी। साल के अंत तक राज्य में संक्रमण के करीब 2.6 लाख मामले हो गए और 2800 लोगों की मौत हो गई। इस बीमारी से राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य,

मुख्यमंत्री खट्टर, उपमुख्यमंत्री चौटाला, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता समेत कई राजनीतिक नेता संक्रमित हुए। सतलुज यमुना संपर्क नहर के मुद्दे पर अगस्त में खट्टर, पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चर्चा की लेकिन बैठक बेनतीजा रही।

इस साल लोगों ने जहां आर्थिक की भयावह स्थिति से धरातल पर खुद को रूबरू किया तो वही सैकड़ों की तादाद में सरकार से भरोसा खत्म कर प्रवासियों ने पलायन करना बेहतर समझा। सैकड़ों ने पलायन किया तो वही अन्य सैकड़ों ने पलायन कर रहे मजदूरों को पीने के लिए पानी से लेकर भोजन उपलब्ध कराने के लिए घर से निकल कर सड़कों पर भोजन वितरित करना बेहतर समझा।

जहां इस महामारी से बचने के लिए सरकार ने सरकारी दफ्तर से लेकर निजी दफ्तर और शिक्षण संस्थानों को भी बंद कर दिया। वही हस्पताल के द्वारा और नगर निगम के कर्मचारी एक पल भी अपने लिए ना सोच कर समाज की सेवा में जुटे रहे।

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More