Pehchan Faridabad
Know Your City

हरियाणा की हरकत से भारत की राजधानी दिल्ली का पानी पीना हुआ दुश्वार, फरीदाबाद हुआ शर्मसार

कहते हैं गलती सुधार लेने वाला व्यक्ति ही समझदार होता है अन्यथा उसकी गिनती मूर्खों में कर दी जाती है। अब अपनी ही कुछ ऐसी हरकतों के चलते ना सिर्फ हरियाणा राज्य बल्कि पूरे हरियाणा वासियों की गिनती कुछ इसी तरह के स्तरों पर की जा रही है।

ऐसा हम नहीं बल्कि भारत की राजधानी दिल्ली का आरोप है। दरअसल दिल्ली सरकार द्वारा हरियाणा राज्य पर यह आरोप लगाया गया है कि उनकी तरफ से प्राप्त होने वाले पानी को प्रदूषित करने में हरियाणा राज्य अव्वल नंबर पर है।

ऐसा इसलिए है क्योंकि यमुना हरियाणा से होते हुए गुजरती है और हरियाणा का प्रदूषण उक्त यमुना नदी में मिलकर प्रदूषित हो रहा है जो दिल्ली वासियों तक पहुंच रहा है। बावजूद आलम यह है कि ना तो हरियाणा सरकार इसमें कोई सुधार करने को राजी है

वही आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्डा ने कहा कि हरियाणा में फेक्ट्री का कचरा यमुना में डालने से नदी दूषित हो जाती हैं

और ना ही यह सब देखकर हरियाणा वासी अपनी आदतों में सुधार करने के लिए आतुर दिखाई दे रहे हैं। यद्यपि यह प्रदूषण इसी तरह बढ़ता रहा तो यमुना नदी का हाल बेहाल होने में ज्यादा वक्त नहीं लगने वाला है।

वही बात करें अगर फरीदाबाद जिले की तो फरीदाबाद जिला गंदगी का हब बन चुका है। वैसे तो नाम के लिए फरीदाबाद में इंडस्ट्रियल एरिया है और फरीदाबाद को औद्योगिक नगरी के नाम से संबोधित भी किया जाता है।

मगर औद्योगिक नगरी से निकलने वाला केमिकल, कूड़ा, करकट यह सब मिलकर नदी को प्रदूषण करने में इतना मग्न हो गए हैं कि इस नदी की अवस्था देख कर भी किसी की आंखों में कोई शर्म तक नहीं दिखाई देती है सब बस अपना उल्लू सीधा करने में मग्न हो चुके हैं।

परिणाम स्वरूप इन सभी लापरवाही का खामियाजा भारत की राजधानी दिल्ली और दिल्ली वासियों को भुगतना पड़ रहा है। आलम यह है कि अब दिल्ली सरकार द्वारा हरियाणा सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जा रहे हैं। जिसके अनुसार हरियाणा की लापरवाही के चलते दिल्ली में प्रदूषित पानी सप्लाई किया जा रहा है।

इतना ही नहीं दिल्ली सरकार का आरोप है कि हरियाणा राज्य की लापरवाही की भेंट यमुना नदी चढ़ चुकी की है, और अब धीरे-धीरे दिल्लीवासियों को भी इस लापरवाही की भेंट पर चढ़ाने की तैयारी हरियाणा सरकार द्वारा की जा चुकी है।

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More