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पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा कांग्रेस अध्‍यक्ष कुमारी सैलजा में बढ़ी खींचतान, हुड्डा ने दिखाया अलग अंदाज़

हरियाणा के शहरी निकाय चुनावो के नतीजे आने के बाद प्रदेश के सभी राजनीतिक दलों पर अब असर दिख रहा है। खासकर हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा कांग्रेस अध्‍यक्ष कुमारी सैलजा के बीच तनाव बढ़ता नज़र आ रहा है।

सोनीपत में कांग्रेस की जीत से उत्साहित हुड्डा ने दावा किया कि सांपला, उकलाना और धारूहेड़ा में भी उनके तथा दीपेंद्र हुड्डा के समर्थक अध्यक्षों ने जीत हासिल की है। पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा नगर निकाय चुनाव के परिणामों के बाद एक अलग ही अंदाज में दिख रहे हैं।

पंचकूला, अंबाला व रेवाड़ी में कांग्रेस की हार पर हुड्डा ने इशारों ही इशारों में इन शहरी निकायों में हुई हार की समीक्षा करने का सुझाव दिया है। हुड्डा के इस सुझाव को हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष कुमारी सैलजा के विरुद्ध नई तरह की मोर्चेबंदी के रूप में देखा जा रहा है। ऐसी ही मोर्चेबंदी हुड्डा ने अशोक तंवर के हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष रहने के दौरान की थी। 

राज्यसभा चुनाव के दौरान हुड्डा व सैलजा के राजनीतिक रिश्तों में खटास शुरू हुई थी। बरोदा उपचुनाव में हालांकि सैलजा चुनाव प्रचार करने गई, लेकिन वहां इंदु नरवाल की टिकट फाइनल होने से पहले दोनों के बीच उम्मीदवार को लेकर काफी खींचतान हुई। बरोदा में हुड्डा समर्थक इंदु नरवाल की रिकार्ड मतों से जीत हुई थी।

हुड्डा ने कहां कि मौजूदा सरकार नगर निकाय चुनावो के परिणामों के बाद जनता की नजरों से उतर चुकी है। उन्होनें कहां कि गठबंधन सरकार के कई विधायक ही तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रहे है।

उन्होंने मुख्यमंत्री के एक बयान से जुड़े सवाल पर कहा कि जब वह मुख्यमंत्रियों के समूह के अध्यक्ष थे, तब हमने सी-टू फार्मूले के तहत एमएसपी पर फसल की खरीद की सिफारिश की थी। हमारी सिफारिश पर ही किसानों से चार फीसदी से ज्यादा ब्याज देश में नहीं लिया जाता। हरियाणा में यह जीरो है।

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