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यदि जीवनदान चाहिए तो नियमित दिनचर्या में शामिल कार्यों में बदलाव की जरूरत : डीसी यशपाल यादव

एक दौर था जब ना तो कोई तकनीक होती थी और ना ही कोई ऐसा तरीका जिससे लोगों को जागरूकता अभियान का उद्देश्य समझाया जा सकें। लेकिन उस वक़्त में भी व्यक्ति अपनी दिनचर्या को लेकर सजग रहना सीख गया था। उस दौर में इतनी खतरनाक बीमारी नहीं थी। लेकिन लोगों में शिक्षा के अभाव होने के बावजूद वह अपनी सुरक्षा हेतु अधिसूचना आदान प्रदान करते थे।

आज का दौर इतना बदल गया है, अगर देश में तहलका मचाने वाली बीमारी कोरोना वायरस के संक्रमण ने दस्तक दी है तो ऐसे में सरकार से लेकर मीडिया, सोशल मीडिया तक इसकी जानकारी दी जा रही है, इससे बचने के लिए एतियायान बरतें जाने की सैकड़ों सुझावों की बौछार है।

लेकिन आज का व्यक्ति इस तकनीक का पालन करने की वजह अपने ही जीवन से खिलवाड़ करने में मग्न है। लेकिन यहां बात सिर्फ एक व्यक्ति की सुरक्षा की नहीं है, बल्कि उससे जुड़ें कई लोगों की है। जिनकी जिंदगी एक व्यक्ति के लापरवाही के चलते तीतर बितर हो जाएगी। इसलिए यदि हमें सुरक्षित रहना और देशहित में अपना समर्थन देना है तो वायरस से खुदको महफूज़ रखना होगा।

इस विषय में फरीदाबाद जिला उपायुक्त यशपाल ने कोरोना वायरस से खुदको महफूज़ रखने हेतु अधिसूचना जारी करते हुए बताया कि हमारे देश में यहां वहां थूकना आम था लोग सड़क किनारे टूटते रहते थे हां धोने की आदत कम हो गई थी जबकि पुराने जमाने में अक्सर बाहर से आने पर या खाने से पहले हाथ पैर धोने को कहा जाता था उसे ही एक बार फिर अपनी दिनचर्या में शामिल करना है इसके अलावा खांसी जुखाम रहता था तो इतनी सावधानी नहीं रखते थे।

अब थोड़ा ज्यादा सजग रहना होगा केवल बाहर ही नहीं बल्कि घर में भी चीते खाते समय दिशा निर्देशों का पालन करना होगा मास्क लगाकर रखने की जरूरत है लेकिन यहां इस बात का ध्यान रखना है कि जो भी व्यक्ति मास्क लगा रहा है यह मत समझिए कि उसे वायरस का संक्रमण नहीं है बल्कि वह दूसरों की सुरक्षा के लिए मास्क लगा रहा है।

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