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आज मनाया जा रहा है लोहड़ी का त्योहार, जानें क्या हैं इसका इतिहास और महत्व

त्योहार भारत देश की शान हैं, हर एक प्रांत के अपने कुछ विशेष त्योहार हैं। इन में से एक हैं लोहड़ी का त्योहार, यह उत्तर भारत का प्रमुख त्योहार है। खासकर पंजाब और हरियाणा में इस पर्व को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

कब मनाया जाता हैं?

लोहड़ी का त्यौहार हिन्दू कैलेंडर के अनुसार पौष माह की आखिरी रात में मनाया जाता है। सिखों के लिए लोहड़ी खास मायने रखती है। त्यौहार के कुछ दिन पहले से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है। विशेष रूप से शरद ऋतु के समापन पर इस त्यौहार को मनाने का प्रचलन है।

क्यों मनाया जाता हैं?

पुराणों के आधार पर लोहड़ी के दिन को सती के त्याग के रूप में प्रतिवर्ष याद करने के लिए मनाया जाता हैं। कथानुसार जब प्रजापति दक्ष ने अपनी पुत्री सती के पति महादेव शिव का तिरस्कार किया था और अपने जामाता को यज्ञ में शामिल नहीं किया था तो उनकी पुत्री ने अपने आपको को अग्नि में समर्पित कर दिया था। उसी दिन को एक पश्चाताप के रूप में प्रति वर्ष लोहड़ी पर मनाया जाता हैं और इसी कारण घर की विवाहित बेटी को इस दिन तोहफे दिये जाते हैं और भोजन पर आमंत्रित कर उसका मान सम्मान किया जाता हैं।

लोहड़ी के पीछे एक एतिहासिक कथा भी हैं जिसे दुल्ला भट्टी के नाम से जाना जाता हैं। यह कथा अकबर के शासनकाल की हैं उन दिनों दुल्ला भट्टी पंजाब प्रान्त के सरदार थे। उन दिनों संदलबार नामक एक जगह थी, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं, वहाँ लड़कियों की अमीर सौदागरों को बेचा जाता था। तब दुल्ला भट्टी ने इस का विरोध किया और लड़कियों को सम्मानपूर्वक इस दुष्कर्म से बचाया और उनकी शादी हिन्द लड़को से करवाकर उन्हें सम्मानित जीवन दिया।इस विजय के दिन को लोहड़ी के गीतों में गाया जाता हैं और दुल्ला भट्टी को याद किया जाता हैं।

कैसे मनाया जाता हैं?

लोहड़ी से कुछ दिन पहले से ही छोटे बच्चे लोहड़ी के गीत गाकर लोहड़ी हेतु लकड़ियां, मेवे, रेवडियां, मूंगफली इकट्ठा करने लग जाते हैं । लोहड़ी की संध्या को आग जलाई जाती है ।लोग अग्नि के चारो ओर चक्कर काटते हुए नाचते-गाते हैं व आग मे रेवड़ी, मूंगफली, खील, मक्की के दानों की आहुति देते हैं। जिस घर में नई शादी हुई हो या बच्चा हुआ हो उन्हें विशेष तौर पर बधाई दी जाती है ।घर में नव वधू हो या बच्चे की पहली लोहड़ी बहुत धूम धाम से मनाया जाता हैं।

लोहड़ी के त्यौहार को पुरे हर्षोउल्लास से मनाया जाता हैं। देश के लोग विदेशों में भी बसे हुए हैं जिसमे पंजाबी ज्यादातर विदेशों में रहते हैं इसलिये लोहड़ी विदेशों में भी मनाई जाती हैं। खासतौर पर कनाडा में लोहड़ी का रंग बहुत देखने को मिलता हैं।

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