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यमुना के पानी में पनपा निमोनिया, तो दिल्ली और हरियाणा का हुआ आमना सामना

यमुना के पानी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण को लेकर हरियाणा राज्य पर लग रहे आरोप के बाद हरियाणा सरकार की मुख्य सचिव विजय वर्धन द्वारा वीरवार को कई विभागों के अफसरों की बैठक बुलाई गई।

जिसमें उन्होंने बताया कि यमुना के पानी में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण का जिम्मेदार हरियाणा राज्य को ठहराया जाता है। इसके बाद उन्होंने वर्तमान स्थिति और दिल्ली की ओर से किए जा रहे दावों की वास्तविकता जानने के लिए फीडबैक लिया।

उधर भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि हरियाणा सरकार के मुख्य सचिव विजय वर्धन द्वारा 12 बजे संभल में हरियाणा सचिवालय कमेटी रूम में एक अहम बैठक आयोजित की गई है।

उक्त बैठक के दौरान हरियाणा प्रदूषण विभाग और सूचना विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल के अलावा हरियाणा शहरी निकाय विभाग, हरियाणा सिंचाई विभाग, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित काफी अफसरों को बुलाया गया है।

इस बैठक के जरिए दिल्ली सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों का मंथन कर वास्तविकता की तस्वीर को सामने रखााा जाएगा। आरोप है कि दिल्ली में जल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। दिल्ली जल बोर्ड उपाध्यक्ष और आप विधायक राघव चड्ढा लगातार हरियाणा पर इस बाबत तंज कसे हुए है।

गौरतलब, दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने इस संबंध में वीडियो जारी कर यमुना में गंदगी फैलाने और अमोनिया बढ़ने का जिम्मेदार हरियाणा को ठहराया है। दावा है कि यमुना में बिना ट्रीट किया गया दूषित पानी छोड़कर अमोनिया का स्तर बढ़ाया जा रहा है।

वही दूसरी तरफ हरियाणा के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर दिल्ली को यह पानी पीने के लिए प्रयोग करना है, तो उनको खुद ट्रीट करना होगा। दूसरी तरफ राघव चड्ढा ने कहा कि साफ पानी लेना दिल्ली और दिल्ली वासियों का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली को जरूरत से कम पानी मिल रहा है और उसमें भी इतना अमोनिया मिल रहा है, जिसके कारण डीजेबी में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में बार-बार दिक्कतें आ रही हैं कईं बार प्लांट बंद भी करना पड़ता है। बोर्ड का दावा है कि प्रभावित इलाकों में पानी की किल्लत दूर करने के लिए टैंकर का प्रबंध किया गया है।

हरियाणा सरकार का जवाब हरियाणा सरकार ने कहा है कि वह यमुना नदी के दिल्ली खंड में पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने के सुझाव से सहमत नहीं है क्योंकि इससे राज्य में पर्यावरण आपदा पैदा हो सकती है।

रूड़की के राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (एनआईएच) ने अपने अध्ययन में सिफारिश की थी कि जनवरी और फरवरी में हरियाणा के यमुनानगर स्थित हथनीकुंड बैराज से प्रति सेंकेंड 10 घनमीटर के स्थान पर 23 घनमीटर पानी छोड़ा जाए ताकि यमुना नदी के अगले हिस्से में पारिस्थितिकी बरकरार रहे।

हथनीकुंड बैराज क्रमश: पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर के माध्यम से हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश में सिंचाई तथा दिल्ली में निगमीय जलापूर्ति के लिए नदी में प्रवाह को विनियमित करता है।

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