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कोवैक्सीन लगवाने से पहले नहीं भरवाए गए सहमति पत्र, स्वास्थ्यकर्मियों ने किया इंकार

कोवैक्सीन को लगवाने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मियों से एक सहमति पत्र (कंसेंट फॉर्म) भरवाना अनिवार्य है। लेकिन शनिवार को फरीदाबाद जिले में किसी भी सेंटर पर सहमति पत्र भरवाया नहीं गया। जिन स्वास्थ्यकर्मियों को शनिवार को कोवैक्सीन लगाई गई उनसे किसी प्रकार का कोई कंसेंट फॉर्म नहीं भरवाया गया। इस कंसेंट फॉर्म पर यहां लिखा हुआ है अगर कोवैक्सीन की वजह से किसी तरह का दुष्प्रभाव या गंभीर प्रभाव’’ पड़ता है तो मुआवजा दिया जायेगा।


इसके अलावा कंसेंट फॉर्म में यहा भी लिखा हुआ है कि कोवैक्सीन के दोनों डोज लगाने के बाद एंटीबॉडी का निर्माण करने की क्षमता को प्रदर्शित किया जाता है। फॉर्म में कहा गया है कि क्लीनिकल प्रभावशीलता संबंधी तथ्य को स्थापित किया जाना अभी बाकी है। इसके अलावा तीसरा चरण का क्लीनिकल ट्रायल में अध्ययन किया जा रहा है। इसलिए जो भी व्यक्ति कोवैक्सीन को लगवा रहा है वहां ह नहीं सोचे की महामारी से संबंधित अन्य सावधानियों का पालन नहीं किया जाना चाहिए। अगर कोई परेशानी होती है तो पीड़ित व्यक्ति को सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय रूप से मान्यता प्राप्त देखभाल प्रदान की जाएगी।

कंसेंट फॉर्म के अनुसार मुआवजा भी मिलेगा


फॉर्म में कहा गया है कि गंभीर अवस्था में भारत बायोटेक द्वारा मुआवजा तब दिया जाएगा जब यह कंर्फम हो जाएगा कि कोवैक्सीन को लगाने के बाद ही उक्त व्यक्ति की सेहत खराब हुई है। उनको मुआवजा दिया जाएगा। फॉर्म पर उक्त व्यक्ति के साइन होने के बाद ही कोवैक्सीन को लगाया जाएगा।

पूरी जानकारी भरी जाती है


कंसेंट फॉर्म में पहले पेज पर कुछ महत्वपूर्ण्र जानकारी दी हुई है। वहीं दूसरे पेज पर जो व्यक्ति कोवैक्सीन को लगवाने के लिए आ रहा था उनको नाम, उम्र, जेंडर, मेरिटल स्टेटस, आई डी नंबर, मोबाइल नंबर, पता आदि जानकारी भरवाई जाती है। उसके बाद उनसे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी ओर भी पूछी जाती है जैसे कि उनको किसी प्रकार की कोई बीमारी तो नहीं है। पिछले 14 दिनों के अंदर अंद रवह महामारी की चपेट में तो नहंी आए है। किसी दवाई से कोई एलर्जी तो नहीं है। अगर कोई महिला कोवैक्सीन को लगवा रही है तो क्या वह गर्भवती तो नहीं है। ऐसी कई जानकारी उनसें पूछी जाती हैं। इसके अलावा उक्त फाॅर्म पर यह भी लिखा जाएगा कि उनको कौन सी तारिख को पहली डोज व दूसरी डोज लगेगी। उनको डोज लगाने वाले नाम व सेंटर का नाम लिखा जाएगा। अंत में एक ऐसे व्यक्ति का नाम व नंबर दिया जाएगा जिसको सुपरवाइजर आॅफिसर कहा जाता है। जिसको कभी भी कोई भी परेशानी होने के बाद फोन करके अवगत करवाया जा सकें। इन सभी जानकारी भरने व पढ़ने के बाद कोवैक्सील लगाने वाले व्यक्ति का साइन करवाया जाता है और उसके बाद कोवैक्सीन लगाई जाती है।


सभी सेंटरों पर नहीं भरवाए गए फाॅर्म

सरकार की ओर से आदेश थे कि सभी सेंटरों पर कोवैक्सीन लगाने वाले सभी स्वास्थ्यकर्मी से सहमति पत्र को भरवाया जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। खेड़ी कला सेंटर पर किसी भी व्यक्ति से कोई फाॅर्म नहीं भरवाया गया। वहीं कौराली में भरवाया गया है। इसके अलावा सेक्अर 3 एफआरयू, सेक्अर 31 एफआरयू व तिगांव केंद्र पर भी कुछ ही लोगों से पत्र भरवाए गए है।

इस बारे में जब गुरूग्राम के सीएमओ डाॅक्टर विरेंद्र यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से आदेश आए है कि सभी स्वास्थ्यकर्मी से पहले कंसेंट फॉर्म भरवाया जाए। उसके बाद ही उनको कोवैक्सीन की डोज लगाई जाए। इसी के चलते उनके जिले के सभी सेंटरों पर सहमति पत्र भरवाने के बाद ही कोवैक्सीन लगाई गई। वहीं फरीदाबाद के सीएमओ डाॅक्टर रणदीप सिंह पुनिया ने बताया कि सरकार की ओर से जो भी गाइडलाइंस आई है उनका पालन किया जा रहा है। जिन जगहों पर सहमति भरवाने की जरूरत थी वहां भरवाए गए है।

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