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खुले आसमान व भीषण ठंड से निकली बेघरों की जान,एचसी का दिल पसीजा तो कराए पुख्ता इंतजाम

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दिन प्रतिदिन मौसम के बदलते रुतबे ने सड़कों पर रात गुजार रहे साधु संत से लेकर बेघर मजदूरों और भिखारियों के लिए परेशानियों के द्वार खोल कर रख दिए हैं। वैसे ही उक्त वर्गों के पास खाने का कोई ठिकाना नहीं होता ऐसे में किसी अच्छी जगह पर रहने की बात तो बहुत दूर है। ऐसे में इन लोगों की परेशानी को समझते हुए और मौसम के हालात को देखते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को भी इन पर तरस आ गया है। जिसके बाद अब इन्हें इस ठिठुरती ठंड से बचाने के लिए एचसी ने हरियाणा सरकार को पुख्ता इंतजाम करने के लिए कहा गया है।

खुले आसमान व भीषण ठंड से निकली बेघरों की जान,एचसी का दिल पसीजा तो कराए पुख्ता इंतजाम

दरअसल, हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को आदेश देते हुए कह दिया है कि बेघर और बेसहारा लोगों के रात्रि को गुजारने के लिए शेल्टर का इंतजाम करने की जिम्मेदारी हरियाणा सरकार को अपने सर लेनी होगी। हाईकोर्ट ने यह आदेश कड़ाके की ठंड में किसी तरह जीवन बिता रहे इन लोगों की स्थिति को लेकर दायर याचिका पर दिया है। जानकारी के मुताबिक यह याचिका कुरुक्षेत्र निवासी बुजुर्ग सरोज जैन द्वारा दायर की गई थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्म सरोवर और सन्निहित सरोवर के इलाके में बड़ी संख्या में साधु-संत और बेघर मजदूर है जो इस भीषण ठंड खुले आसमान के नीचे ही रात बितानी पड़ती है। इसके अलावा याचिकाकर्ता की ओर से यह भी बताया गया कि कई बार वह इन लोगों को कंबल वितरित लिए जा चुके है, बावजूद इन लोगों को ओस से भीगे कंबलों में रात बितानी पड़ती है।

खुले आसमान व भीषण ठंड से निकली बेघरों की जान,एचसी का दिल पसीजा तो कराए पुख्ता इंतजाम

याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट ने इस बारे में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का भी हवाला दिया। कोर्ट को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में जरूरतमंद लोगों को रात में ठहराने का इंतजाम करने का आदेश दिया है। इसको देखते हुए धार्मिक नगरी कुरुक्षेत्र में भी साधु-संतों, बेघर मजदूरों और भिखारियों के लिए ऐसा ही आदेश दिया जाए। याचिकाकर्ता की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को बेघर लोगों को ठंड से बचाने का आदेश दिया। वही, हरियाणा सरकार की ओर से मामले में जवाब दिया गया कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है।

Written by: Isha singh

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