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कृषि कानून बना गणतंत्र दिवस के लिए सजा, तो किसानों को रोकने के लिए पूर्व सैनिक ने हाथ जोड़ा

देशभर में हर वर्ष धूमधाम से मनाए जाने वाले 26 जनवरी यानी कि गणतंत्र दिवस समारोह पर इस बार कृषि कानूनों का विरोध कर रहे सैकड़ों किसान टकटकी लगाए अपने आक्रोश के जरिए सरकार को जिताने की फिराक में है।

जहां पहले ही किसानों द्वारा 26 जनवरी यानी गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड निकालने की चेतावनी दी जा चुकी हैं। वहीं दूसरी तरफ अगर पूर्व सैनिकों ने किसानों से अपील करते हुए गणतंत्र दिवस पर किसी भी तरह की खलल ना डालने की अपील की है।

हाल ही में दिल्ली में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारियों की बैठक आयोजित हुई, जिसमें उन्होंने किसानों के नाम पर एक पत्र जारी करते हुए अपील की है। पत्र में उनके माध्यम से कहा गया है कि हमें पूरा विश्वास है कि आंदोलनकारी किसान ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे सेना और देशवासियों का मान कम हो।

फिर भी कुछ लोगों द्वारा इस तरह के बयान आ रहे हैं। इसलिए किसान संगठनों को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि असमंजस की स्थिति साफ हो सके।

दूसरी तरफ लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी और ले. ज. डॉ. डीपी वत्स ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री द्वारा गया उद्घोष जय जवान जय किसान केवल एक नारा नहीं है, यह देश की सच्ची भावना है।

देश का सैनिक सीमा पर डटकर दुश्मनों से रक्षा करता है तो किसान अपने खेतों में अन्न उगाकर देश का पेट भरता है। इतिहास गवाह है कि दूसरे देशों से युद्ध के समय किसानों ने सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया है और विजय दिलाई है।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि गणतंत्र दिवस समारोह एक आधिकारिक कार्यक्रम होता है और यह देश की प्रतिष्ठा और सम्मान के साथ जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि किसान इस दिन दर्शक दीर्घा में बैठें और सेना का मनोबल बढ़ाएं।

बैठक में रि. ब्रिगेडियर डा. भुवनेश चौधरी, कन्हैया लाल सिंह, आरके बग्गा, मोहित शर्मा, रि. कमांडर वीएम त्यागी, लेफ्टिनेंट यूएस बोरा, सीपीओ रंजीत सिंह, कोमल सिंह, एसवी सिंह, जय चंद, कर्नल संतपाल, अजीत सिंह, आजाद सिंह, धर्मेंद्र सिंह, डीके चौधरी, भूपेंद्र सिंह, राज सिंह आदि मौजूद रहे ।

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