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मामला लव ज़िहाद का नही ऑनर किलिंग का: तौसीफ, कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

फरीदाबाद का निकिता हत्‍याकांड मामला देशभर में चर्चा और आक्रोश का विषय बना था. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में निकिता के अपहरण में नाकाम आरोपियों ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी थी.

वारदात का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था. इंटरनेट से लेकर जमीन तक, इंसाफ की मांग को लेकर लोगों ने रोष का इजहार किया था. इस मामले को लेकर लोगों के बीच गुस्‍सा देखा गया है.

बीते 26 अक्टूबर 2020 को बल्लभगढ़ की छात्रा निकिता की सरेआम हत्या कर दी गई थी. इस हत्याकांड के विरोध में  बल्लभगढ़ में लोगों ने सड़क जाम कर दिया था. इसमें कई पार्टियों और राजनीतिक संगठनों के लोगों के शामिल होने की बात भी कही गई थी. हिंसा फैसाने के आरोप में पुलिस ने 32 लोगों को गिरफ्तार किया था. 

तौसीफ़ हत्या के इरादे से 26 अक्टूबर को निकिता के कॉलेज अग्रवाल कॉलेज पहुंचा था. तौसीफ़ और उसके साथी रेहान ने एक दिन पहले अग्रवाल कॉलेज की रेकी भी की थी. तीनों ही आरोपियों पर हत्या, आपराधिक साज़िश, अपहरण और आर्म्‍स एक्‍ट की धाराए लगाई गई हैं. मामले में तौसिफ मुख्य आरोपी है, जबकि रेहान और अजरू बाकी आरोपी हैं.

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बहुचर्चित निकिता तोमर हत्याकांड के मुख्य आरोपी तौसीफ की निष्पक्ष जांच की मांग संबंधी याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। तौसीफ ने याचिका में राजनीतिक रंजिश के चलते उसे फंसाने का आरोप लगाया था।

राजनीतिक कारणों से पुलिस कमिश्नर जांच को प्रभावित कर रहे हैं। याची ने कहा कि उस पर आरोप लगाया जा रहा है कि वह निकिता पर धर्म परिवर्तन कर विवाह के लिए दबाव बना रहा था, जो पूरी तरह से गलत है।

लव जिहाद के नाम पर उसे फंसाया जा रहा है। जो वीडियो पुलिस के पास है उसमें आरोपियों का मुंह पूरी तरह से ढका हुआ था और नंबर प्लेट तो कोई भी बदल सकता है। केवल ऐसी वीडियो के आधार पर पुलिस ने जल्दबाजी दिखाते हुए उसको गिरफ्तार कर लिया।

याची ने कहा कि यह मामला लव जिहाद का नहीं बल्कि ऑनर किलिंग का है। उसके पास ऐसी कोई वजह नहीं थी जिसके चलते वह निकिता की हत्या करे। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर अब अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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