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ट्रैक्टर रैली पुलिस का हाल करेगी बेहाल, देखना होगा मजेदार कैसे हालात नियंत्रण करेंगे सीएम मनोहरलाल

कृषि कानूनों के खिलाफ सरकार को चेतावनी के लिए अब किसानों द्वारा 26 जनवरी के कार्यक्रम के रंग में भंग डालने का कार्य किसानों की ट्रैक्टर के लिए बखूबी भूमिका अदा करने वाली है। जहां यह रैली सरकार को छिपाने का प्रयास होगा वहीं दूसरी तरफ हरियाणा पुलिस के लिए यह मुश्किल बढ़ाएगी।

और दूसरी तरफ केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा पहले ही हरियाणा सरकार को यह निर्देश दिए जा चुके हैं कि ट्रैक्टर रैली को रोकने हेतु हरियाणा सरकार पुलिस विभाग को किसी प्रकार की गाइडलाइन जारी ना करें।

इसके अलावा यह भी कहा गया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के हर मुमकिन प्रयास हरियाणा सरकार द्वारा पुलिस बल की सहायता से किया जाए। इतना ही नहीं अब हरियाणा सरकार कोई चिंता सताए जा रही है

कि यदि पी जिन ट्रैक्टरों के माध्यम से मार्च निकाला जा रहा है अगर वह अचांचक से बीच रास्ते में खराब हो जाए तो क्या होगा। इससे परिणाम यह होगा कि इन खराब ट्रैक्टरों की वजह से न केवल सड़कों पर, बल्कि दिल्ली में भी जाम के हालात पैदा हो सकते हैं।

इसी कड़ी के हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल अपने विभागीय अधिकारियों से फीडबैक हासिल करने के बाद लगातार केंद्र को रिपोर्ट दे रहे हैं। खुफिया एजेंसियों ने सरकार को सूचना दी है कि ट्रैक्टरों को दिल्ली की तरफ बढ़ने से रोकना किसी सूरत में उचित नहीं होगा।

उनकी चिंता है कि यदि ट्रैक्टर दिल्ली में घुस गए और वहां उनमें किसी तरह की खराबी आती है अथवा किसान वापस नहीं लौटते, तब उस स्थिति में सरकार के सामने किस तरह के विकल्प होंगे।

किसान आंदोलन का पूरा संचालन किसान संगठनों की संयुक्त समन्वय समिति के हाथों में हैं। इस समन्वय समिति में सात सदस्य हैं। भाकियू अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी कांग्रेस व आप तथा शिव कुमार कक्का भाजपा की विचारधारा के किसान नेता हैं।

बाकी पांच सदस्य कम्युनिस्ट-वामपंथी विचारधारा के पक्षधर हैं, इसलिए खुफिया एजेंसियों ने सरकार को रिपोर्ट दी है कि यह आंदोलन पूरी तरह से वामपंथी विचारधारा के हाथों में है, जिसको कांग्रेस का समर्थन मिल रहा है।

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