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कौन कहता हैं कि उम्र ढलते ही जज्बा कम हो जाता है, 55 की उम्र में साइकिलिंग करते हुए पहुंचे अटारी बाॅर्डर

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सपना देखने से ज्यादा उसको पूरा करने का जज्बा होना जरूरी है। ऐसा ही एक जज्बा जिले के पुलिसकर्मी व आम आदमी में देखने को मिली। जिसके चलते दोनों साइकिलिंग करते हुए फरीदाबाद से अटारी बॉर्डर तक गए। इसके अलावा वह अमृतसर के गुरूद्वारे पर भी मथा टेक कर आए है। साइकिलिंग के दौरान ही दोनों व्यक्ति की पहचान हुई थी। जज्बा के आगे उनकी उम्र भी फीकी नजर होती दिखाई दे रही है।

एस्कॉर्ट में तैनात एसआई हुकुम कुमार ने बताया कि उनकी उम्र 55 साल की है। उनको साइकिल का शौक काफी समय से है। लेकिन इस शौक के चलते उनको शहरवासी पहचानने लगे हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस के द्वारा साल 2020 के अंत में एक साइकिलिंग का आयोजन किया गया।

कौन कहता हैं कि उम्र ढलते ही जज्बा कम हो जाता है, 55 की उम्र में साइकिलिंग करते हुए पहुंचे अटारी बाॅर्डर

जिसमें उनको साइकिल चलानी थी। लेकिन पता नहीं वह साइकिलिंग रेस में बदल गई। उस रेस में वह पहले स्थान पर आए थे और उनका दोस्त सेक्टर 10 निवासी भव्य कौशिक दूसरे स्थान पर आए थे। जिसके बाद उन दोनों ने कई रेस एक साथ की।

कुछ दिन पहले उनके दोस्त भव्य का फोन आया कि चलो अटारी बाॅर्डर चलते है साइकिल से। उनके द्वारा यह पहली इतनी लंबी लाईकिल रेस थी। उन्होंने उपने दोस्त को हां बोल दी। जिसके बाद वह और उनका दोस्त भव्य कौशिक 20 जनवरी की सुबह साइकिल से अटारी बाॅर्डर के लिए निकल गए।

कौन कहता हैं कि उम्र ढलते ही जज्बा कम हो जाता है, 55 की उम्र में साइकिलिंग करते हुए पहुंचे अटारी बाॅर्डर

उन्होंने बताया कि रात के समय वह विभिन्न जिलों में रूके। रात के समय आराम करने के बाद वह सुबह अपने गंतव्य की ओर निकल पड़ते है। उन्होंने यह रेस 24 जनवरी को रात 11 बजे फरीदाबाद की पुलिस लाइन आकर खत्म की।

उन्होंने बताया कि उनके द्वारा साइकिल के रास्ते 1062 किलो मीटर साइकिल चलाई गई। उनके द्वारा आते वक्त अमृतसर के गुरूद्वारे में भी मथा टेक कर आए है। उन्होंने बताया कि वह हर रोज करीब 100 किलो मीटर साइकिल चलाते है। एसआई हुकुम का कहना है कि उनके द्वारा यह पहली इतनी लंबी साइकिल है।

कौन कहता हैं कि उम्र ढलते ही जज्बा कम हो जाता है, 55 की उम्र में साइकिलिंग करते हुए पहुंचे अटारी बाॅर्डर

जिसमें उन्होंने भाग लिया। ठंड होने की वजह से उनको कई परेशानी का सामना करना पड़ा लेकिन कहते है ना कि अंत भला तो सब भला। वहीं भव्य कौशिक ने बताया कि उनका खुद का बिजनेस है। उनका बिजनेस भी ट्रेकिंग का ही है। लेकिन वह हर रोज 100 किलो मीटर साइकिल करते है। वह पूरी तैयारी के साथ साइकिल करते है। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा यह दूसरा लंबा रूट है। आने वाले समय में वह लोगों को भी साइकिल के बारे में जागरूक करते है।

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