December6 , 2021

घायल लाल किला पूछता है की कहा गया “जय जवान जय किसान ” का नारा

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फरीदाबाद : दिल्ली से सटे लगभग हर प्रदेश की सीमा पर किसान अब तक अपने हक़ की लड़ाई लड़ता हुआ दिखाई दे रहा था लेकिन 26 जनवरी को दिल्ली में लाल किले पर ट्रैक्टर परेड के दौरान कुछ अलग ही मंजर देखने को मिला है ।

इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि जिस लाल किले पर हर साल तिरंगा शान से फहराया जाता था उसके साथ किसी अन्य झंडे को फैरता देख पूरे देशवासियों के दिल में एक सवाल जरूर उठ कर आया है

की क्या इसी दिन के लिए आप उन सरहदों पर बैठे इंतजार कर रहे थे कि कब देश का सबसे बड़ा पर्व आएगा और हम इस तरह का उपद्रव मचाएंगे।

करीब 5 हजार से अधिक की तादाद में किसान मुकरबा चौक से होते हुए बेरिकेड तोड़ते हुए लाल किले पर जा पहुंचे थे।

मंगलवार को हुई हिंसा के बाद केंद्रीय पर्यटन मंत्री प्रह्लाद पटेल लाल किला पहुंचे। केंद्रीय मंत्री ने वहां पहुंच कर ऐतिहासिक इमारतों में हुए नुकसान का जायजा लिया। केंद्रीय मंत्री के दौरे की वजह से पर्यटकों की एंट्री बंद कर दी गई है।

लाल किले पर जो कुछ भी हुआ उसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. लाल किले पर जो कुछ हुआ ये क्या महज संयोग कहा जा सकता है? क्या हजारों की भीड़ आकर ऐसे ही किसी राष्ट्रीय स्मारक पर चढ़कर देश की इज्जत तार तार कर सकती है?

लाल किले पर अराजकता से ना सिर्फ पूरा देश शर्मिंदा है बल्कि इसने किसान आंदोलन को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

कहा गया जय जवान जय किसान का नारा

कल का जो मंजर आंखों के सामने था वो सभी ने देखा । गणतंत्र दिवस के दिन प्रदर्शनकरियो ने परेड़ के नाम जो हिंसा की है वो किसी भी रूप में प्रदर्शन का हिस्सा नही है । लाल किले पर जो लोग मौजूद थे कथित तौर पर खुद को भारत माँ के बेटे कहे रहे थे

पर सवाल यह उठता है कि भारत माँ के दो बेटे कल आमने सामने थे जो एक किसान थे और दूसरे जवान थे। भारत देश वो देश है जो जंहा दोनों का सम्मान बहुत ऊंचा है लेकिन कल जो लोग सुरक्षाकर्मियों को धक्का देकर गिरा रहे थे उन्होंने इस नारे को ही झूठा साबित कर दिया