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ट्रैक्टर और दूसरे वाहनों में खाना लिए पुनः सैकड़ों की संख्या में सिंधु बॉर्डर पर किसान हुए रवाना

कृषि कानून नामक बम फूटने के चलते किसानों में भूचाल की स्थिति बनी हुई है। मगर आलम यह है कि महीनों बाद भी किसानों का धरना प्रदर्शन और आंदोलन अपने मुकाम पर पहुंचने में असमर्थ साबित हो रहा है।

इसका कारण यह है कि किसानों की मनोदशा देख भी केंद्र सरकार अपने फैसले से कदम पीछे हटाने को तैयार नहीं है। जिसके चलते किसानों का आंदोलन और अधिक तेजी से नए रुख की ओर अग्रसर हो रहा है।

इसी कड़ी में एक बार फिर अपने साथ खाने पीने की सामग्री के अलावा अन्य जरूरी सामान लिए हरियाणा के विभिन्न जिलों से सैकड़ों किसान एक बार फिर सिंधु बॉर्डर पर जत्था लेकर पहुंचने के लिए रवाना हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक रवाना हुए अधिकतर किसानों में कुछ सिंधु बॉर्डर पर उठेंगे तो वहीं कुछ देर रात वापसी भी कर सकते हैं।

पंचायत में फैसला लिया गया था कि रविवार को 30 से 35 ट्रैक्टर-ट्रॉली से 300 से अधिक किसान धरने में शामिल होने सिंघु बॉर्डर जाएंगे। 6 गांवों की पंचायत के प्रधान राजकुमार मलिक ने कहा कि यह किसी एक जाति की लड़ाई नहीं है। यह सभी जाति के किसानों की लड़ाई है इसलिए सब मिलकर सिंघु बॉर्डर पर चलें।

जानकारी के मुताबिक अंबाला जिला के नारायणगढ़ क्षेत्र से और कुरुक्षेत्र जिला के शाहाबाद बाबैन वगैरह क्षेत्रों से काफी संख्या में किसान अपने अपने गांवों से खाने पीने का सामान खरीद कर सिंघु बॉर्डर पर ले जा रहे हैं।

इस बाबत जानकारी देते हुए भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि जो किसान केवल 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड में शामिल होने के लिए आए थे उनमें से ज्यादातर वापस चले गए हैं। उन्होंने आगे यह भी बताया कि अब जो किसान आ रहे हैं वे दूसरे वाहनों से सिंघु बॉर्डर पर ज्यादा जा रहे हैं।

इस बीच पानीपत में किसान आंदोलन के समर्थन में मलिका खाप की पंचायत हुई है। 6 गांवों ने पंचायत कर निर्णय लिया कि गांवों से किसान दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर पहुंचेंगे, रविवार को एक के बाद एक करके सैंकड़ों की संख्या में ट्रैक्टर ट्रॉलियों में किसान सिंघु बॉर्डर की ओर कूच कर गए। इन किसानों में काफी संख्या में महिलाएं भी मौजूद हैं और इन महिलाओं का हौसला भी देखते बन रहा है।

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