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अगर पब्लिक प्रॉपर्टी को पहुंचाया नुकसान तो करनी पड़ सकती है भरपाई, कानून लाने की तैयारी में सरकार

पब्लिक प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना अब भारी पड़ सकता है। सीएम मनोहर लाल ने शनिवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। उन्होंने संगठन के विषयों के साथ किसान आंदोलन, महापंचायतों से बने हालातों की जानकारी दी।

इसके बाद सीएम ने कहा कि जो भी भविष्य में पब्लिक पॉपर्टी को नुकसान पहुंचाएगा, वही उसकी भरपाई करेगा। इसको लेकर कानून विधानसभा के बजट सत्र में लाया जाएगा। इस बीच प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने भिवानी में विवादित बयान दिया है।

अगर पब्लिक प्रॉपर्टी को पहुंचाया नुकसान तो करनी पड़ सकती है भरपाई, कानून लाने की तैयारी में सरकार
अगर पब्लिक प्रॉपर्टी को पहुंचाया नुकसान तो करनी पड़ सकती है भरपाई, कानून लाने की तैयारी में सरकार

आंदोलन में हुईं किसानों की मौतों के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘कुछ तो स्वेच्छा से मरे हैं। कुछ की हार्टअटैक व बुखार जैसी बीमारियों के चलते मौत हुई है। ये घर में होते, तो भी मरते। लाख दो लाख में से बीमारियों से 206 महीने में नहीं मरते क्या? लेकिन कोई कैसे भी मरे, घर तो खराब होता है। उनकी मौत पर मैं संवेदना व्यक्त करता हूं।’ कृषि मंत्री के बयान का विपक्षी दलों ने विरोध किया। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि अन्नदाताओं के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग संवेदनहीन व्यक्ति ही कर सकता है। इन्हें कैबिनेट से बर्खास्त किया जाना चाहिए।

विवाद बढ़ा तो देर शाम दलाल ने वीडियो जारी कर माफी मांगी। कहा, ‘मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर चलाया गया। मैं भी किसान का बेटा हूं। किसानों के मरने पर मुझे बड़ा दुख हुआ है।’

अगर पब्लिक प्रॉपर्टी को पहुंचाया नुकसान तो करनी पड़ सकती है भरपाई, कानून लाने की तैयारी में सरकार
अगर पब्लिक प्रॉपर्टी को पहुंचाया नुकसान तो करनी पड़ सकती है भरपाई, कानून लाने की तैयारी में सरकार

उधर, भाजपा से गठबंधन तोड़कर डिप्टी सीएम दुष्यंत से इस्तीफा देने की मांग पर जजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व संरक्षक डॉ. अजय चौटाला ने सिरसा में कहा, ‘दुष्यंत के इस्तीफा देने से कोई फर्क पड़ता है तो इस्तीफा मेरी जेब में है। कभी भी देने को तैयार हूं। हरियाणा के किसी भी मंत्री के इस्तीफे से फर्क नहीं पड़ेगा।’

ऐसे में हरियाणा के लोगों को अपने हितों को ध्यान में रखकर आंदोलन से पीछे हट जाना चाहिए। कांग्रेस, इनेलाे और लाल झंडे वाले लोग भाेले-भाले किसानाें काे भड़का रहे हैं, जबकि तीनाें कृषि कानून पूरी तरह किसानों के हक में हैं।

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