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जानिए जिले का ऐसा कौन सा मंदिर है, जिसमें पांडवों ने जीत के लिए पूजा अर्चना की थी

अगर आप माता के भक्त है तो आपके लिए भी जिले में एक ऐसा मंदिर बना हुआ है। जिसके बारे में शायद ही कुछ लोग जानते होंगे। लेकिन इस मंदिर में दूरदराज से लोग माता के दर्शन करने के लिए आते हैं।

जी हां हम बात कर ले हैं मोहना गांव के जंगल में बने मां कालका के मंदिर की।

मंदिर में वैसे हर रोज ही भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं। लेकिन नवरात्रों के दिनों में यहां भक्तों का जमावड़ा सा लग जाता है। मोहना गांव के लोगों के द्वारा कोई भी शुभ कार्य करने से पहले माता के दर्शन करने के लिए मंदिर में जाते हैं।

मंदिर के संरक्षक पूरनलाल ने बताया की नवरात्रों के दिनों में फरीदाबाद से ही नहीं, बल्कि दिल्ली और यूपी के भी श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि सच्चे मन से मांगी गई मुराद पूरी होती है।

नवरात्रों के दिनों में मोहना गांव के आसपास रहने वाले श्रद्धालु पैदल ही मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं। इसके अलावा इस मंदिर में कई ऐसे श्रद्धालु भी होते हैं, जो अपने बच्चों का मुंडन करवाने के लिए भी आते हैं

मंदिर की क्या है मान्यता

पूरन लाल का कहना है कि गांव मोहना में बना मां कालका का मंदिर काफी प्राचीन है। कहा जाता है कि पांडव जब इस इलाके से गुजर रहे थे। तो यहां स्थित मां कालका मंदिर पर उनकी नजर पड़ी ओर उन्होंने माता की पूजा की और विजय होने का आशीर्वाद मांगा।

मंदिर में प्राचीन होने का सबूत मंदिर के आसपास बने चार विशालकाय खंभे हैं। यह भी मान्यता है कि मंदिर में जब धर्मराज युधिष्ठिर पूजा कर रहे थे। तो उनके चारों भाई मंदिर में पहरा दे रहे थे। उनके भाइयों के नाम से ही चारों दिशाओं में विशालकाय खंबे बनाए हुए हैं। जिसकी श्रद्धालु आज भी पूजा करते हैं।

मंदिर का आकार काफी विशाल है। लेकिन काफी पुराना होने की वजह से जर्जर होने लगा था। जिसके बाद ग्रामीणों के द्वारा ही इसको ठीक करवाया गया । उन्होंने बताया यह मंदिर करीब डेढ़ एकड़ में फैला हुआ है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशालाएं बनवाई हुई है।

क्योंकि इस मंदिर में दूरदराज से भक्त आते हैं। जो भी भक्त दूरदराज से आते हैं वह आरती होने के बाद ही जाते हैं। इसलिए उनके लिए धर्मशालाएं बनवाई हुई है। ताकि वह आरती के बाद आराम से रुक सके। उन्होंने बताया नवरात्रों के दिनों में करीब 200 से अधिक दुकानें लगती है। जिसमें खान-पान से लेकर प्रसाद व अन्य जरूरत का सामान मिलता है।


मूर्ति के पीछे अरबी में लिखा हुआ है कुछ

कहां जाता है पहले मोहना गांव का नाम मोहनगढ़ था। इसलिए मां कालका को मोहनगढ़ वाली मां कालका के रूप में भी जाना जाता है। बताया जा रहा है मंदिर में स्थापित मां कालका की मूर्ति अष्ट धातु की बनी हुई है। क्योंकि उस मूर्ति के पीछे अरबी भाषा में कुछ लिखा हुआ है। मां की मूर्ति कुएं से निकली थी।

जिसे आज तक कोई भी नहीं समझ पाया है और ना ही पढ़ पाया है। अभी तक किसी को यह नहीं पता चल पाया है कि इस मंदिर की स्थापना कब और किसने की थी। इस बात की पुख्ता जानकारी किसी के पास नहीं है। मंदिर में हर महीने की सप्तमी और अष्टमी के दिन भक्तों का जमावड़ा लगता है।

इसी वजह से वह सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। अलावा यह भी कहा जाता है कि मंदिर में जो पत्थर लाए गए थे वह पांडवों के मंजिलें भाई भीम के द्वारा लाए गए थे।

ऐसे पहुंच सकते हैं मंदिर

अगर आपको फरीदाबाद से मोहना गांव जाना है तो सबसे पहले आपको फरीदाबाद से 8 किलोमीटर दूर बल्लभगढ़ शहर तक पहुंचना होगा। उसके बाद आपको बल्लभगढ़ शहर से मोहना गांव के लिए सवारी लेनी होगी। जिसमें सरकार के द्वारा बसें चलाई गई है। इसके अलावा आप ऑटो से भी जा सकते है।

दोनों ट्रांसपोर्ट के जरिए आप आसानी से मोहना गांव पहुंच जाएंगे। वहीं यूपी के रहने वाले श्रद्धालु आसानी से केजीपी के रास्ते होते हुए गांव मोहना में प्रवेश कर लेंगे। वहीं दिल्ली से आने वाले श्रद्धालुओं को सबसे पहले फरीदाबाद आना होगा और उसके बाद वह बल्लभगढ़ के रास्ते होते हैं गांव मोहन जाएंगे। यही नहीं दिल्ली से आने वाले श्रद्धालु केजीपी के रास्ते भी गांव मोहना आ सकते हैं ।

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