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सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक

शादी कर अपना नया जीवन यापन करना भला कौन नहीं चाहता। मगर जागरूकता के चलते अब उसी युवक को कोई पिता अपनी बेटी सौंपने को तैयार होता है जिसके पास व्यापार और रोजगार कुछ ना कुछ जरूर हो। परंतु हरियाणा के भिवानी जिले में ना तो नौजवानों को अच्छा रोजगार मिल रहा है

और ना ही उनकी खेती में अच्छी पैदावार हो रही है। ताकि कोई भी उक्त गांव के नौजवान युवकों को अपनी बेटी का हाथ देने को तैयार हो। दरअसल, इसका कारण यह है कि हरियाणा में सैकड़ों किल्ले जमीन पर सूखापन दूर दूर तक छाया हुआ है।

सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक
सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक

एक फसल होने के बाद वहां दूसरी फसल हो इसकी कोई गारंटी नहीं ली जा सकती है यही सूखापन अब यहां के युवाओं की जिंदगी को सुना करता जा रहा है। ।

वैसे तो गांवों में युवाओं के नाम कई किल्ले जमीन तो है, मगर वास्तव उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। यही कारण है कि सूखी जमीन अब सात फेरों पर भारी पड़ रही है। कुछ गांवों में यह दिक्कत इतनी गहराती जा रही है कि दूसरे जिलों, यहां तक कि भिवानी जिले के सुविधा संपन्न गांवों के लोग भी अपनी लड़कियों की शादी करने के लिए तैयार नहीं।

सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक
सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक

जानकारी के मुताबिक सिवानी सिंचाई उपमंडल और लोहारु विधानसभा क्षेत्र में ऐसे कई गांव हैं, जहां के परिवारों के पास आमदनी के साधन उपलब्ध नहीं है। वहीं जब लड़की वाले रिश्ते की बात करने आते हैं तो सबसे पहले यही पूछते हैं कि लड़का करता क्या है,

जमीन कितनी है, पानी लगता है या नहीं। लड़के का कोई कारोबार है क्या। लड़के वाले कई किल्ले जमीन की बात तो कहते हैं, लेकिन भूमि असिंचित होने के कारण लड़की वालों का जवाब न में ही होता है।

सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक
सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक

अविवाहित मयंक ने बताया कि नहरी पानी न मिलने से कुछ गांवों में फसल नहीं होती, बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। जमीन सूखी पड़ी है। उनके गांव झुंपा कलां में छह महीने से हालात बेहतर हुए हैं। सर्दियों में पानी की दिक्कत नहीं हुई।

गर्मियों में भी ऐसा ही रहा तो अच्छी फसल होगी। उनकी सरकार से यही विनती है कि बॉर्डर के सभी गांवों में नई माइनर बनाकर अंतिम टेल तक पानी पहुंचाएं ताकि बेरोजगार युवा खेती कर आर्थिक तौर पर संपन्न हो सकें और उनकी शादी हो सके।

सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक
सूखी जमीन ने छीना युवाओं के दूल्हे बनने का सपना, बेरोजगारी के अभाव में सेहरा बांधने को तरसे युवक

वही उक्त मामले में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का कहना है कि वह उक्त क्षेत्र की सभी दिक्कतों से वाकिफ हैं। उन्होने कहा कि इतना ही भी समय समय पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों से नई नहरों के निर्माण व पानी आपूर्ति की रिपोर्ट भी मांगी जा रही है। उन्होने कहा कि पुरजोर कोशिश की जा रही है कि आने वाले दिनों में हालात में काफी सुधार लाया जा सकें।

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