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खट्टर की बदसलूकी से भ्रष्ट निगम अधिकारियों के गर्दन पर लटकी तलवार, मेयर नजर आई एक्शन मोड़ में

बीते कुछ दिनों से फरीदाबाद में नगर निगम एसडीओ सुरेंद्र खट्टर द्वारा फरीदाबाद मेयर सुमन बाला के साथ बदतमीजी करने का मामला सुर्खियों में है। दरअसल हुआ कुछ यूं कि जब फरीदाबाद महापौर सुमन बाला जनता से मिल रही शिकायतों के चलते नगर निगम द्वारा बनाए गए शौचालय का निरीक्षण करने मौके पर पहुंची।

जब उन्होंने सार्वजनिक शौचालयों की बद से बदतर हालत को देखकर एसडीओ सुरेंद्र खट्टर से सवाल जवाब किए तो एसडीओ साहब ने सार्वजनिक शौचालय की खराब हालत का कोई वाजिब कारण देने की बजाय मेयर सुमन बाला पर ही यह आरोप लगा दिया कि वह नगर निगम को बदनाम कर रही है और निरीक्षण बीच में ही छोड़ कर मौके से खिसक गए।

जिसके बाद मेयर सुमन बाला द्वारा इस पूरे मामले की जानकारी नगर निगम आयुक्त यशपाल यादव को दी गई जिस पर कार्यवाही करते हुए नगर निगम आयुक्त द्वारा एसडीओ सुरेंद्र खट्टर को इस पूरे वाक्य का कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया वहीं मीडिया द्वारा भी मामले पर काफी जोर दिया गया।

जिसके बाद मामला ऊपर तक पहुंचा और हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज द्वारा भी इस मामले में कार्यवाही करते हुए तत्काल प्रभाव से एसडीओ सुरेंद्र खट्टर को निलंबित कर दिया गया है। लेकिन इसके बाद भी यह मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है और एक के बाद एक इस मामले से जुड़े कई राज निकलकर सामने आ रहे है।

दरअसल एसडीओ सुरेंद्र खट्टर को निलंबित किए जाने के बाद अब फरीदाबाद मेयर सुमन बाला द्वारा प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को चिट्ठी लिखकर नगर निगम को स्वच्छ भारत मिशन के तहत दी गई ग्रांट की जांच राज्य चौकसी ब्यूरो द्वारा कराए जाने की अपील कि गई है क्योंकि उनका मानना है कि नगर निगम के कई अधिकारी एक बड़े घोटाले में शामिल हो सकते है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को लिखी गई चिट्ठी में मेयर सुमन बाला द्वारा कहा गया है कि 2015 से लेकर 2021 तक फरीदाबाद नगर निगम को जो ग्रांट दी गई थी नगर निगम के अधिकारियों द्वारा उसका दुरुपयोग किया जा रहा है जिससे सरकार के पैसे की बर्बादी हो रही है और जनता को उससे कुछ भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।

मेयर सुमन बाला द्वारा चिट्ठी मे लिखा गया है कि फरीदाबाद शहर में 12 करोड रूपए की लागत के सार्वजनिक शौचालय लगाए जाने की बात नगर निगम द्वारा कि जा रही थी लेकिन नगर निगम द्वारा बेहद खराब गुणवत्ता वाले टॉयलेट लगाए गए हैं जिनको ना तो शिविर से जोड़ा गया है और ना ही उन में पानी की कोई व्यवस्था है। जिसके चलते इन टॉयलेट की दुर्दशा ऐसी हो चुकी है इनके के पास से गुजरने पर भी बेहद गंदी दुर्गंध आती है।

वही मेयर द्वारा लिखा गया है कि शहर के लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक करने के लिए भी नगर निगम फरीदाबाद द्वारा नुक्कड़ नाटक कराए जाने के बात कही गई थी लेकिन बिना कोई नुक्कड़ नाटक कराए गए एक कंपनी को नगर निगम द्वारा एक करोड रुपए का भुगतान किया गया है जो बिल्कुल गलत है।

इसके साथ ही उनके द्वारा लिखा गया है कि फरीदाबाद के सभी वार्डों को जेसीबी द्वारा साफ कराए जाने की बात की गई थी लेकिन किसी भी वार्ड में कोई साफ सफाई नहीं कराई गई है और एक एजेंसी को इसके लिए 1 करोड रुपए का भुगतान किया गया है जो सरासर सरकार के पैसे की बर्बादी है।

साथ ही इस चिट्ठी में उन्होंने सीधे-सीधे लिखा है कि उन्हें संदेह है कि स्वच्छ भारत मिशन फरीदाबाद के अधिकारी ठेकेदारों के साथ मिलकर सरकार द्वारा ग्रांट किए गए पैसे का दुरुपयोग कर रहे हैं जिससे जनता के बीच सरकार की छवि तो खराब हो ही रही है साथ ही दावे किए गए कार्यों में भी देरी हो रही है।

जिसके लिए उन्होंने सीएम खट्टर से आग्रह किया है कि वे राज्य चौकसी ब्यूरो द्वारा इस पूरे मामले की जांच कराएं ताकि यदि नगर निगम के अधिकारियों द्वारा कोई घोटाला किया गया है तो वह जांच में सामने निकल कर आ सके।

अब देखना यह होगा कि फरीदाबाद मेयर सुमन बाला द्वारा प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को लिखी गई चिट्ठी का जवाब किस प्रकार दिया जाता है और यदि इस चिट्ठी के जवाब में नगर निगम के अधिकारियों की जांच राज्य चौकसी ब्यूरो द्वारा की जाती है तो उसका क्या परिणाम सामने निकल कर आएगा।

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