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सरकारी स्कूल के दीवारें तो बना दी पर छत बनाना भूल गया शिक्षा विभाग, जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर बच्चे

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी ने हाल ही में बदरौला स्थित मिडिल स्कूल का निरीक्षण किया जहां उन्होंने अव्यवस्था पाकर स्कूल के प्रिंसिपल व अध्यापकों को खूब सुनाया।

दरअसल इन दिनों नवनियुक्त जिला शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी स्कूलों का निरीक्षण कर रही है और स्कूलों की पूरी व्यवस्था को लेकर प्रिंसिपल तथा अध्यापकों से इसकी जानकारी प्राप्त कर रही हैं। अब तक जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा कई स्कूलों का निरीक्षण किया जा चुका है। इसी तर्ज पर जिला शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी ने बदरौला स्थित मिडिल स्कूल का दौरा किया तथा वह अव्यवस्था देखकर स्कूल के प्रिंसिपल और अध्यापकों को खूब सुनाया।

शिक्षा अधिकारी जब स्कूल के निरीक्षण के लिए पहुंचे तो गाड़ी से उतर कर सीधे ही स्कूल जा पहुंची जहां अधिकारी ने पाया कि स्कूल के प्रांगण में शराब की बोतल और नमकीन के पैकेट पड़े हुए हैं वही स्कूल की बिल्डिंग भी आधी अधूरी बनी हुई है। जब इस विषय में शिक्षा अधिकारी ने सफाई कर्मचारी शीला से पूछा तो उन्होंने बताया कि बहन जी क्या करूं गांव ही शराबियों का है शाम होते ही गांव के शराबी यहां बैठकर शराब पीने लगते हैं।

स्कूल की बिल्डिंग के बारे में जब शिक्षा अधिकारी ने जानकारी लेनी चाही तो स्कूल के प्रिंसिपल और अध्यापक स्कूल की जानकारी नहीं दे सके और वही बिल्डिंग की भी जानकारी स्कूल के हेड ने नही दे पाए। उन्होंने केवल इतना ही बताया कि 2003 स्कूल की बिल्डिंग बनाने का काम शुरू हुआ जिसके बाद बजट न मिलने के कारण स्कूल की छत नहीं डाली गई।

पीडब्ल्यूडी ने भी इस स्कूल को कई सालों पहले जर्जर घोषित कर दिया है। इस पर शिक्षा अधिकारी ने स्कूल के अध्यापक व अन्य कर्मचारियों की डिटेल्स मांगी है जिससे उचित कार्यवाही की जा सके।


ऐसे में है सोचने वाली बात है कि जब सरकारी स्कूलों का यह हाल है तो यहां पर पढ़ने वाले भविष्य का क्या हाल होगा।

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