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मासूमों की दर्दनाक कहानी, मां काम पर भेजती हैं, दुकानदार आराम नहीं करने देता

चेहरे पर मुस्कान तो सभी रखते हैं लेकिन उस मुस्कान के पीछे कितने दर्द भरे हैं शायद यह जानना काफी कठिन है। मासूम बच्चे भी काफी बार अपनी भोली सूरत लेकर मजबूरी में काम करने निकल पड़ते हैं। बाल श्रम करवाना अपराध है, लेकिन शहर के दुकानदारों को इसकी परवाह नहीं हैं। उन्हें सस्ते श्रमिक मिल जाते हैं और वे बेखौफ होकर उनसे सुबह से रात तक काम करवाते हैं।

शहर के काफी इलाकों में छोटे – छोटे मासूम आपको काम करते नज़र आ जायेंगे। यह बच्चे मजबूरी में ऐसा काम करते हैं। इनके स्वजन भी बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय आमदनी के लालच में बच्चों को दुकानों पर काम के लिए भेज देते हैं।

हमारे देश में हर जगह बालश्रम, होता है। यह बच्‍चों से स्‍कूल जाने का अधिकार छीन लेता है। पिछले दिनों स्टेट क्राइम ब्रांच ने ऐसे चार बच्चों को दुकानों पर काम करते पकड़ा है। क्राइम ब्रांच की टीम ने एक गारमेंट्स की दो दुकान से 11 और 12 साल के दो बच्चों को काम करते पाया। इनमें से एक बच्चे ने टीम को बताया कि पिता की मौत हो चुकी है।

पिता का साया जब छूट जाता है तो अपने भी पराये जैसा व्यवहार करते हैं। आपसे दूर भागने का प्रयास करते हैं। इस मामले में बच्चे के पिता की मृत्यु के बाद मां और नानी स्कूल नहीं जाने देती। वे उसे जबरन दुकान पर भेजते हैं। दुकान मालिक सारा दिन काम करवाता है। बीच में आराम भी नहीं करने देता है। यह कहानी देश के हर कोने में बसी है।

हमारे देश में बाल मजदूरी पर पाबंदी के बावजूद कई दुकान, होटल, मोटर पार्टस शॉप और मशीनरी वर्क बच्चों के सहारे किए जा रहे हैं। इसके प्रति हम भी कभी जागरूक नहीं होते हैं।

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