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जर्जर स्कूल की इमारतों में पढ़ने को मजबूर है सरकारी स्कूल के बच्चे, विभाग का नहीं है ध्यान

हरियाणा सरकार पर देश भर में मॉडल संस्कृति स्कूल खोलने की योजना बना रही है परंतु पहले से चल रहे सरकारी स्कूलों के हालात ही बद से बदतर बने हुए हैं। जिले में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे अपनी जान को जोखिम में डालकर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं। जिले में कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनके स्कूल की बिल्डिंग ही जर्जर अवस्था में चाहे वह बदरौला सरकारी स्कूल हो या फिर बड़खल का सरकारी स्कूल हो।

दरअसल, गांव बड़खल में 60 साल पुरानी जर्जर बिल्डिंग में चल रहा सरकारी स्कूल बच्चों के लिए खतरा बन सकता है। इतना ही नहीं स्कूल के कुछ हिस्सों पर ग्रामीणों ने अतिक्रमण कर रखा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि स्कूल में एक क्लासरूम की खिड़की गांव के एक घर में खुलती है। जिला शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी द्वारा इस स्कूल का जायजा भी लिया गया है।

जर्जर स्कूल की इमारतों में पढ़ने को मजबूर है सरकारी स्कूल के बच्चे, विभाग का नहीं है ध्यान
जर्जर स्कूल की इमारतों में पढ़ने को मजबूर है सरकारी स्कूल के बच्चे, विभाग का नहीं है ध्यान

वही स्कूल की प्रिंसिपल अलका कवर ने बताया कि स्कूल को मॉडल संस्कृति स्कूल के रूप में विकसित किया जाना था परंतु स्कूल की स्थिति को देखते हुए उस सूची से भी स्कूल का नाम कट गया। स्कूल को लेकर विधायक सीमा त्रिखा ने शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुर्जर को पत्र के माध्यम से अवगत कराया है लेकिन अभी तक इस स्कूल पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

आपको बता दें कि इस स्कूल में 1717 विद्यार्थी पढ़ते है और 23 कमरे हैं जिसमें साइंस कॉमर्स औरआर्ट्स तीनों संकाय के विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसके चलते यहां पर कंप्यूटर लैब भी बनाए गए हैं परंतु लैब भी केवल खानापूर्ति करते हैं।

जर्जर स्कूल की इमारतों में पढ़ने को मजबूर है सरकारी स्कूल के बच्चे, विभाग का नहीं है ध्यान
जर्जर स्कूल की इमारतों में पढ़ने को मजबूर है सरकारी स्कूल के बच्चे, विभाग का नहीं है ध्यान

स्थिति यह है कि कमरों के अभाव में स्कूल को दो शिफ्टों में चलाया जाता है। दो शिफ्टों में स्कूल को चलाने के बावजूद भी एक बेंच पर दो या तीन विद्यार्थी बैठते हैं ऐसे में कोरोना के चलते सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हो पाता है।

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