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हुड्डा के तंज पर दुष्यंत का पलटवार, हुड्डा का यह दाँव क्या देगा मनोहर और दुष्यंत को घाव ?

कृषि कानूनों के खिलाफ जहां सैकड़ों किसानों द्वारा अपने लिए न्याय की गुहार लगाने के लिए महीनों से सड़कों पर दिन रात गुजार रहे हैं। वहीं इस विषय को विपक्षी सरकार खासकर कांग्रेस द्वारा भुनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही है।

इस बीच जहां हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा विधानसभा सत्र में गठबंधन सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पत्र लाने का दावा किया जा रहा है वही हरियाणा के छोटे सरकार ( दुष्यंत चौटाला )भी बेफिक्र होकर अपनी सरकार को और अधिक मजबूत बनाने की बात कह रहे है।

दरसल, दुष्यंत चौटाला द्वारा दावा किया जा रहा हैै कि आंतरिक तौर पर कांग्रेस खुद टूटी और बिखरी हुई है। विपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने सभी 30 विधायकों के हस्ताक्षर भी अविश्वास प्रस्ताव पर नहीं करा पाए। कांग्रेस के दो विधायकों ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं कर गठबंधन की सरकार का पहले ही समर्थन कर दिया है।

चौटाला ने दावा किया कि 10 मार्च को कांग्रेस का यह अविश्वास प्रस्ताव बुरी तरह से ढह जाएगा। भाजपा, जजपा और निर्दलीय विधायक मिलकर मजबूती के साथ कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव का जवाब देंगे।

दुष्यंत चौटाला ने दावा किया कि अगले चार साल तक भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार पूरी मजबूती के साथ चलेगी। उन्होंने वित्तीय वर्ष खत्म होने के बाद यानी अप्रैल में मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत देते हुए कहा कि तब खुशखबरी की उम्मीद की जा सकती है।

उन्‍होंने कहा कि हरियाणा सरकार किसानों को उनकी मर्जी के हिसाब से भुगतान करेगी। 67.48 फीसद किसानों ने अपने स्वयं के खातों में तथा बाकी ने आढ़ती के माध्यम से पैसा हासिल करने की इच्छा जाहिर की है।

दुष्यंत ने दावा किया कि भाजपा व जजपा गठबंधन कामन मिनिमम प्रोग्राम के तहत अपने चुनावी वादों को पूरा करने की ओर तेजी से अग्रसर हैं।

अब देखना यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का अविश्वास प्रस्ताव पत्र दुष्यंत चौटाला और मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच में तनातनी का माहौल बना थाने में कितना सक्षम हो पाएगा। इतना ही नहीं बल्कि यह देखना काफी महत्वपूर्ण होगा कि दुष्यंत चौटाला अपनी कही बातों पर कितने कायम रहते हैं।

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