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ज़्यादा दिनों तक नहीं चला राकेश टिकैत के आंसुओं का जादू, कुछ ऐसा है आंदोलन पर काबू

राकेश टिकैत लगातार पिछले कुछ महीनों से भारत में सबसे प्रसिद्ध व्यक्तियों में से एक हो गए हैं। उनके आंसुओं की बात करें तो वो खेल अब फीका पड़ता जा रहा है। किसान आंदोलन में अब सरकार के काबू में थोड़ा बहुत आता दिखाई दे रहा है। राकेश टिकैत के आंसुओं ने कृषि सुधार विरोधी आंदोलन को संजीवनी दे दी थी, लेकिन अब उनका जादू उतार पर है।

यह काम किसी नेता या अधिकारी ने नहीं बल्कि एक साधारण छात्रा ने कर दिखाया। नए कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन से सुर्ख़ियों में आये किसान नेता राकेश टिकैत की छात्रा ने बोलती बंद करदी थी।

किसान आंदोलन लगातार भयावह रूप लेता जा रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसान अपना शतक लगा चुके हैं। टिकैत झज्जर-दिल्ली सीमा पर स्थित ढांसा बॉर्डर पर कृषि कानून विरोधी आंदोलनकारियों को संबोधित कर रहे थे। तभी मंच पर वह बच्ची पहुंच गई। देश में जबसे किसान आंदोलन चला है उसी दिन से दिल्ली – एनसीआर के लोगों की मुसीबतें बढ़ी हैं।

हर दिन किसानों की संख्या भी बढ़ रही है। इतने लंबे समय से दिल्ली को घेरे किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। इसी सिलसिले में जब छात्रा ने टिकैत से सवाल करना चाहा तो उन्होंने सीधे टिकैत से सवाल पूछ लिया कि आंदोलन का हमारे समाज और आपसी मेल-मिलाप पर क्या असर पड़ रहा है, यह देखा जाना चाहिए?

किसान आंदोलन दिल्ली की सीमाओं पर पिछले 100 दिनों से अधिक समय से चल रहा है। टिकैत के पास उस छात्रा के प्रश्नों का उत्तर नहीं था। अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करना लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन यह तभी तक सही है, जब तक किसी के अधिकारों का हनन ना हो रहा हो।

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