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अविश्वास प्रस्ताव से सीएम मनोहर को ठेंगा दिखाने वाले भूपेंद्र हुड्डा सहित उनका प्रस्ताव औंधे मुंह गिरे

पिछले कई महीनों से जहां सैकड़ों किसान कृषि कानूनों के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन करने के लिए सड़कों पर दिन रात गुजार रहे हैं। वही हरियाणा में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा भी अविश्वास प्रस्ताव के जरिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को सेंध लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही थी, मगर जैसे उम्मीद की जा रही थी सदन में इसका बिल्कुल विपरीत असर देखने को मिला है।

दरसल,कांग्रेस पार्टी द्वारा रखा गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में औंधे मुंह गिरा हुआ प्रतीत होते दिखा। जजपा को दोफाड़ करने और निर्दलीय विधायकों को साथ लाने की योजना भी सिरे नहीं चढ़ पाई। प्रत्यक्ष मतदान और पार्टी व्हिप के कारण भी किसी विधायक ने प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा होने की हिम्मत नहीं जुटाई।

कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव को दो निर्दलीय विधायकों बलराज कुंडू और सोमवीर सांगवान का समर्थन जरूर मिला, लेकिन कुंडू ने साफ कर किया कि वह कांग्रेस के साथ नहीं, किसानों के समर्थन में लाए प्रस्ताव के साथ हैं, इसलिए इसके पक्ष में मतदान कर रहे हैं। सांगवान पहले ही सरकार से किसानों के मुद्दे पर समर्थन वापस ले चुके हैं, ऐसे में उनको भी सरकार के खिलाफ ही जाना था।

जजपा विधायकों ने अविश्वास प्रस्ताव पर बोलने के लिए समय न देने को लेकर सदन में नाराजगी जरूर जताई, मगर खड़े सरकार के साथ ही हुए। जजपा विधायक देवेंद्र बबली तो गुस्सा ही गए। उन्होंने स्पीकर से कहा कि प्रस्ताव पर बोलने का समय दें।

स्पीकर ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि उनके लीडर की ओर से दी गई सूची में आपका नाम नहीं है। इससे वह नाराज हो गए और कहा कि उन्हें तो इस्तीफा ही दे देना चाहिए। जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने भी चर्चा में भाग लेने का मौका न मिलने पर नाराजगी व्यक्त की।

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