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अकाल मौत वो मरे जो काम करे चंडाल का, काल भी उसका क्या बिगाड़े जो भक्त हो महाकाल का

शिव शंकर को जिसने पूजा उसका ही उद्धार हुआ, अंत काल में भवसागर में उसका बेड़ा पार हुआ। कुछ इसी तरीके से पूरे फरीदाबाद के मंदिरों में शिवरात्रि के पूरे दिन महादेव का जयघोष होता रहा।

दरअसल, हिंदू धर्म में शिवरात्रि की काफी मान्यता है। मान्यता है कि इस दिन माता सती का रूप मां पार्वती और महादेव का विवाह हुआ था। हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है. इस दिन पूजा-अर्चना से शिवभक्तों को महादेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ मनोकामनाएं पूरी होती हैं. शिवरात्रि , हिन्दू परंपरा का एक बहुत बड़ा पर्व है. इसे फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है.

माना जाता है इस दिन शिव जी का प्राकट्य हुआ था.इस दिन महादेव की उपासना से व्यक्ति को जीवन में सम्पूर्ण सुख प्राप्त हो सकता है. इस दिन व्रत, उपवास , मंत्रजाप तथा रात्रि जागरण का विशेष महत्व है. जिले के सभी मंदिरों में भक्तगण लंबी लंबी कतारों में खड़े होकर भगवान शिव के दर्शन करने के लिए बेताब दिखे।

एनआईटी पांच स्थित बांके बिहारी मंदिर में कोरोना के मद्देनजर काफी तैयारियां की गई। मंदिर में एंट्री गेट पर सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई थी वही मंदिर में आने वाले भक्तगणों के लिए मास्क लगाना अनिवार्य किया गया था। वही शिवरात्रि के अवसर पर शिव बारात भी निकाली गई जिसमें सभी भक्तगण शिव की भक्ति में लीन दिखाई दिए।

वही महारानी वैष्णो देवी मंदिर में भी महाशिवरात्रि को लेकर काफी तैयारियां की गई। मंदिर में आने वाले भक्तगणों के लिए भी मंदिर में विशेष सुविधा की गई थी। भक्तगण कतारों में खड़े होकर अपने आराध्य भगवान शिव के दर्शन कर रहे थे।

सैनिक कॉलोनी स्थित शिव मंदिर में महाशिवरात्रि को लेकर काफी धूम देखने को मिली। लंबी लंबी कतारों में भक्तगण अपने आराध्य के दर्शन करते हुए दिखे। फरीदाबाद के सबसे बड़े शिवलिंग के दर्शन के लिए लोगों उत्सुक दिखे। मंदिर में आए भक्तगणों ने बताया कि महादेव के दर्शन भर से ही सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।

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