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घोटाला: जमीन अधिग्रहित मामले में चोर के साथ- साथ कोतवाल शक के घेरे में

जमीन अधिग्रहण मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे- वैसे कई अधिकारियों पर इस मामले की गाज गिर सकती है। अब रेलवे अधिकारियों पर भी संदेह की सुई घूमने लगी है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार रेलवे ने जिस भूमि का अधिग्रहण किया है उसकी जरूरत ही नहीं थी।

दरअसल, यूपी के दादरी से लेकर नवी मुंबई तक रेलवे कॉरिडोर का निर्माण होना है जिसके लिए करीब 8 साल पहले नोटिफिकेशन गजट जारी कर दिया गया है। रेलवे कॉरिडोर के निर्माण के लिए पलवल के कुछ गांव का अधिग्रहण किया गया था जिसमें असावटी, मेधापुर, लाडपुर, जटौला, ततारपुर पृथला गांव के 15 एकड़ जमीन शामिल है। जानकारी मिली है कि यहां 100 मीटर जमीन पर करीब 500 लोगों को मालिक बना दिया गया है।

घोटाला: जमीन अधिग्रहित मामले में चोर के साथ- साथ कोतवाल शक के घेरे में
घोटाला: जमीन अधिग्रहित मामले में चोर के साथ- साथ कोतवाल शक के घेरे में

आपको बता दें कि अधिग्रहण के लिए सेक्शन 4 का नोटिस जारी होने से पहले ही राजस्व विभाग के अधिकारियों ने नियमों की उल्लंघना करनी शुरू कर दी। इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब 100 मीटर की जमीन के लिए करीब 22 साढ़े करोड रुपए का मुआवजा देने की बात आई। रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों को यह बात खटकी और उन्होंने अपने स्तर पर इस मामले की जांच की और जांच के बाद इस मामले को सीएम मनोहर लाल खट्टर के संज्ञान में लाया।

इसकी जांच जब शुरू हुई तो परत दर परत मामला खुलता चला जा रहा है। इस मामले में एसडीएम की भूमिका पर भी जांच हो रही है व इस घपले बाजी में एसडीएम के रिश्तेदार सहित स्टाफ अभी संदेह किया जा रहा है।

घोटाला: जमीन अधिग्रहित मामले में चोर के साथ- साथ कोतवाल शक के घेरे में
घोटाला: जमीन अधिग्रहित मामले में चोर के साथ- साथ कोतवाल शक के घेरे में

राज्यसभा के अधिकारियों का कहना है कि जिस व्यक्ति ने रजिस्ट्री करवाई है वह उसकी पहचान कर सकते हैं परंतु जमाबंदी के कागजात में शामिल लोगों के फोटो नहीं है। जमाबंदी में एक नाम है परंतु रजिस्ट्री में 30- 30, 40-40 नाम है। अब इस मामले में रेलवे अधिकारियों की कार्यशैली को भी संदेह भरी निगाहों से देखा जा रहा है।


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