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झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक

टीवी यानि ट्यूबरक्लोसिस एक ऐसी बीमारी जिसका इलाज सिर्फ और सिर्फ दवाइयों से होता है। लेकिन आज के आधुनिक युग में भी लोग लोग झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र से ट्यूबरकुलोसिस का इलाज करवाते हैं। जिससे वह अपनी बीमारी को और गंभीर बना ही रहे हैं। लेकिन साथ ही वह अपने शरीर को भी खराब कर रहे हैं। यह कहना है सर्वोदय नर्सिंग स्कूल के स्टूडेंट के द्वारा नाटक के जरिए बताया गया।

बीके हॉस्पिटल में वर्ल्ड टीबी डे मनाया गया। जिसमें सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग के द्वारा एक रैली निकाली गई। रैली में लोगों को जागरूक किया गया कि टीवी एक ऐसी बीमारी है, इसका पूरा इलाज होने के बाद ही ठीक हो पाएगी। अगर इलाज बीच में छोड़ दिया जाएगा। उस मरीज को दोबारा से इलाज़ शुरू करना पड़ेगा।

झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक
झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक

इसके अलावा लोगों को यह भी बताया गया कि अगर उनको अपने शरीर में टीवी के कोई भी लक्षण पाए जाते हैं। तो वह उसकी तुरंत जांच करवाएं। इस अवसर पर डिप्टी सीएमओ डॉ शीला भगत ने बताया कि उनकी टीम के द्वारा समय-समय पर लोगों को जागरूक कर टीवी के मरीजों को उपचार के लिए प्रेरित करने का काम किया जाता है।

इस मौके पर सीएमओ डॉ रणदीप सिंह पुनिया के द्वारा दिखाकर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। यह रैली बीके हॉस्पिटल से होते हुए बीके चौक तक गई। इस दौरान रैली में मौजूद स्टाफ के द्वारा लोगों को जागरूक किया गया कि टीवी एक ऐसी बीमारी है जिसका इलाज सिर्फ और सिर्फ दवाई है। टीवी को जड़ से खत्म करने के लिए उनको उसका पूरा कोर्स करना होता है। इसके अलावा उनको यह भी बताया गया कि सरकार के द्वारा उनको पोषण भत्ते के रूप में हर महीने 500 रुपए दिए जाते हैं। इसके लिए उनको नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर संपर्क करना होगा।

झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक
झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक

झाड़-फूंक से नहीं होता है इलाज

अगर किसी मरीज को टीवी की बीमारी होती है। तो उनके परिजनों को लगता है कि इसका इलाज सिर्फ और सिर्फ झाड़-फूंक है यानी तांत्रिक के जरिए झाड़-फूंक किया जाता है। उसी से ही टीवी का इलाज होता है। लेकिन यह गलत है क्योंकि टीवी एक ऐसी बीमारी है। जिसका इलाज दवाई के द्वारा किया जाता है और वह दवाई का एक कोर्स होता है।

जिसको पूरा ही करना होता है। अगर उस कोर्स को बीच में छोड़ दिया जाता है तो टीवी का मरीज कभी भी ठीक नहीं हो पाता है। इसीलिए टीवी के मरीज को उक्त कोर्स पूरा करना होता है। यह जानकारी आज सर्वोदय नर्सिंग स्टूडेंट और बीके के नर्सिंग स्टूडेंट के द्वारा नाटक के जरिए दी गई।

झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक
झाड़-फूंक से नहीं होता है टीवी का इलाज नाटक के जरिए किया जागरूक

इस अवसर पर आई एम ए की प्रधान डॉ पुनीत, डिप्टी सीएमओ डॉ रमेश, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश, डिप्टी सीएमओ डॉ राम भगत, डिप्टी सीएम ओ डॉ गिरीश, डिप्टी सीएम डॉक्टर नरेंद्र कौर, डिप्टी सीएमओ डॉ हरीश आर्य, डॉ योगेश, सुभाष, विरेंदर, राजकुमार, अशोक आदि मौजूद थे।

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