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लापरवाही: सरकारी धन को पलीता लगा रहा है शिक्षा विभाग, अब हुआ यह बड़ा खुलासा

जिले में शिक्षा विभाग की ओर से लापरवाही का एक और मामला सामने आया है जहां विद्यार्थियों के लिए आई हुई साइकिलों को उन्हें नहीं दिया गया वही साइकिल बंद कमरे में पड़ी-पड़ी कबाड़ में तब्दील हो गई। शिक्षा विभाग में जंग लगी सिलाई मशीन के बाद अब करीब पांच दर्जन जंग लगी साईकिल मिली हैं। सेक्टर-28 के सरकारी स्कूल का कमरा खुला तो पता चला कि यहां पर भी साइकिलों में जंग और करीब 2 हजार चार्ट एवं मानचित्र को दीमक लगी है। शिक्षा विभाग द्वारा साईकिल अनुसूचित जाति और दो किलोमीटर दूर से आने वाले विद्यार्थी को दी जाती हैं।

सेक्टर-28 के सरकारी स्कूल में जिला शिक्षा विभाग का ब्लॉक ऑफिस कार्यरत था और कुछ दिनों पहले इस कार्यालय को जिला मुख्यालय में शिफ्ट किया गया है। इसके बाद बंद पड़े कमरों को खोला गया और कमरे से 53 साईकिल, करीब 2 हजार चार्ट एवं मानचित्र के बंडल मिले हैं।

लापरवाही: सरकारी धन को पलीता लगा रहा है शिक्षा विभाग, अब हुआ यह बड़ा खुलासा
लापरवाही: सरकारी धन को पलीता लगा रहा है शिक्षा विभाग, अब हुआ यह बड़ा खुलासा

ये सामान शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थी के उपयोग के लिए दिया जाता है। ऐसे में गैर जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से शिक्षा विभाग को लाखों का पलीता लगा हैं साथ ही विद्यार्थियों को उनका अधिकार नहीं मिल पाया है।

दरअसल, जिन विद्यार्थियों का घर स्कूल से चार-पांच किलोमीटर दूर था उन्हें सत्र 2013-2014 में साइकिल मुहैया कराई गयी थी। उस समय खंड शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी थी। उन्होंने बची हुई 22 साइकिलों के विषय में मार्गदर्शन के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा था। उनके ट्रांसफर के बाद बिना स्टॉक चेक किए उस समय के नियुक्त अधिकारी ने सरकार से नई साइकिलों की मांग की और उसके बाद स्टॉक में साइकिलों की संख्या बढ़कर 53 हो गई।

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लापरवाही: सरकारी धन को पलीता लगा रहा है शिक्षा विभाग, अब हुआ यह बड़ा खुलासा

क्या कहना है शिक्षा विभाग अधिकारी का
जिला शिक्षा अधिकारी रितु चौधरी का कहना हैं कि लगातार शिक्षा विभाग में बंद कमरों और रिकॉर्ड रूम में मिल रहे सामान को देखते हुए मैंने जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, प्रिंसिपल और मुख्याध्यापक सभी को पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया है कि अपने अपने स्कूलों में बंद पड़े कमरों को खुलवाकर सामान की विषय अनुसार लिस्ट बनाकर जिला कार्यालय को भेजी जाए। ताकि विद्यार्थियों के उपयोग की वस्तुओं और लेखा सामग्री को जाँच कर उनको उपयोग में लाया जा सके।

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