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निकिता हत्याकांड: एक साल बाद जेल से बाहर आ सकते हैं तौसीफ व रेहान, इस नियम से मिल जाएगी राहत

निकिता तोमर हत्याकांड एक ऐसी घटना जिसने सभी को भावुक कर दिया था। इस घटना ने सभी को झकझोर रख दिया था। हर बाप अपनी बेटी की सलामती की दुआएं मांगने लगा था। इस हत्याकांड के हत्यारों को सजा सुना दी गई है। कोर्ट ने हत्यारे तौसीफ और रेहान को उम्रकैद व 28 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

निकिता का परिवार अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं है। उनकी मांग और साथ ही अधिकतर लोगों की मांग फांसी की सजा है। दोषियों ने सरेआम कानून को अपने हाथ में लेकर जिहाद किया था।

इस हत्याकांड से पूरा फरीदाबाद ग़मगीन हो गया था। देश और दुनिया में इस हत्याकांड ने सभी को सहमा दिया। दोषियों को उम्रकैद की सजा मिली है। लेकिन हतयारे तौसीफ व उसका साथी रेहान एक साल बाद जेल से बाहर आ सकते हैं। नियमों के मुताबिक कानून में इसका प्रावधान है। फैसला सुनाए जाने के एक साल के बाद सजा याफ्ता बंदी कोर्ट में पेरोल के लिए अपील लगा सकता है।

पहचान फरीदाबाद लगातार इस हत्याकांड से जुडी पल – पल की खबर आपतक पहुँचा रहा था। कल दोषियों को सजा दी गई थी इसकी जानकारी भी पहचान फरीदाबाद ने अपने पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाई। फांसी की सजा को लेकर कल कोर्ट में बहस शुरू हुई थी। लेकिन हत्यारों को न्यायाधीश सरताज बसवाना की अदालत ने उम्रकैद की सजा सुना दी।

फरीदाबाद में कल पूरा दिन यह हत्याकांड चर्चा का विषय बना रहा। सभी की निगाहें फैसले पर थी। निकिता के हत्यारें नियमों के मुताबिक, एक साल बाद कोर्ट में पेरोल की अर्जी लगा सकते हैं। इसके लिए जिला उपायुक्त से मंजूरी लेनी होती है। उपायुक्त मजबूत गारंटी के बाद ही मंजूरी देता है। इसमें मकान की मरम्मत के लिए चार हफ्ते, खेती बाड़ी के लिए छह हफ्ते, घर में किसी की मृत्यु हो जाए तो दो हफ्ते व शादी के लिए 28 दिन की पेरोल का प्रावधान है।

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