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नये कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन को लेकर किसान लंबी लड़ाई को तैयार

किसान आंदोलन को पूरे 4 महीने होने जा रहे हैं। लेकिन अभी किसान अपनी मांगों को लेकर पड़े हुए हैं। अब कोरोना महा मारी भी फिर से फैलने लगी है। प्रतिदिन कोरोना के कई नए मरीजों सामने आ रहे हैं।

ऐसे में भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत का कहना है कि सरकार कोरोना की आड़ में उन जगह प्रतिबंध लगा सकती है जहां अधिक संख्या में किसान धरने पर बैठे हैं। जबकि आंदोलनकारी किसान 1 लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं। टिकैत ने कहा कि आंदोलन जारी रखने के लिए उन्होंने नवंबर दिसंबर तक की तैयारी की हुई है।

ज्ञात है कि किसान केंद्र सरकार द्वारा बनाए नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं। जोकि द प्रोड्यूसर्स एंड कॉमर्स एक्ट 2020, द फार्मर्स एग्रीमेंट ऑन प्राइस इंसोरेंस कमोडिटीज़ एक्ट 2020 एवं द एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट 2020 हैं।

आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार को इन नए कानूनों को वापस लेना चाहिए। क्योंकि उन्हें आशंका है कि इन कानूनों से एमएसपी और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी । जबकि सरकार नए कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है।

सितंबर माह में पारित हुए नए कृषि कानूनों को वापस लेने के लिए चल रहे किसान आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक कृषि कानून को वापस नहीं लिया जाता तब तक किसान आंदोलन जारी रहेगा। किसानों के संगठन संयुक्त किसान मोर्चा ने 26 मार्च को भारत बंद का आह्वान किया है।

इस कारण देश के विभिन्न हिस्सों में रेलवे सड़क परिवहन के प्रभावित होने की संभावना है और बाजार भी बंद रहेंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के दौरान भारत बंद सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलेगा।

भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने अपने दिवंगत पिता महेंद्र सिंह टिकैत को इस दौरान याद करते हुए कहा कि वे हमेशा कहा करते थे कि यदि हरियाणा आंदोलन के समर्थन में खड़ा होता है तो सरकार कब जाती है।

राकेश टिकैत का कहना है कि यह लड़ाई केवल किसानों की नहीं बल्कि गरीब व छोटे व्यापारियों की थी। आंदोलनकारी किसान आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं जबकि सरकार की तरफ से भी साफ कह दिया गया है कि कानून वापस नहीं होगा।

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