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कुंडली बॉर्डर पर किसानों ने बनाई लाखों रूपए की झोपड़ी, मिट्टी के घर की खासियत देख आप भी रह जाएंगे दंग

किसान आंदोलन अब किसान आंदोलन नहीं कब्ज़ा आंदोलन ज़्यादा हो गया है। अवैध रूप से सड़कों पर अपने अस्थायी ठिकाने किसान लगातार बनाते जा रहे हैं। कुंडली बार्डर पर धरने पर बैठे कृषि कानून विरोधी आंदोलनकारियों ने गर्मी और लू से बचाव के प्रयास शुरू कर दिए हैं। सर्दी खत्म होते ही इन्होंने बांस, सरकंडों और पुआल से झोपड़ियां बनाई थीं, लेकिन भीषण गर्मी से ये झोपड़ियां लोगों का बचाव नहीं कर सकतीं।

लोगों का रास्ता रोक, उन्हें परेशान कर यह किसान लगातार सहानुभूति खोते जा रहे हैं। पंजाब के रोपड़ से आए लोगों ने झोपड़ी की अंदरूनी एवं बाहरी दीवारों पर चिकनी मिट्टी की लिपाई कर दी है। यहां तक कि झोपड़ी के फर्श की भी लिपाई-पुताई कर उन्हें आकर्षक रूप दिया गया है।

दिल्ली की सीमाओं पर शतक लगा बैठे किसान अपनी जिद्द पर अभी भी अड़े हुए हैं। चार महीने पहले जब धरना शुरू हुआ तो उस समय ठंड की शुरुआत हो चुकी थी। इसके बाद भीषण ठंड भी आंदोलनकारियोंका मनोबल नहीं तोड़ पाई। अब चूंकि गर्मी शुरू हो गई है, तो इससे बचाव का भी प्रबंध किया जा रहा है। बांस और सरकंडों से झोपड़ियां तो बना लीं, लेकिन चूंकि ये गर्मी और तपती लू से लड़ने में सक्षम नहीं हैं, इसलिए इसका भी तोड़ निकाला गया है।

किसान आंदोलन अब आम जनता को परेशानी देने लगा है। आमजान किसानों से काफी खफा हो रहे हैं। यहां इन्होनें झोपड़ी की अंदरूनी दीवारों पर चिकनी मिट्टी से लिपाई कर दी गई है। फर्श को भी मिट्टी से लीपा-पोता गया है। एक झोपड़ी में कई चारपाइयां बिछाने की जगह है। एक-एक झोपड़ी में आठ चारपाइयां तक बिछाई गई हैं। यहां तक कि झोपड़ी में आधुनिक टायलेट, वाशबेसिन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

किसानों का कम और राजनीति का आंदोलन यह जान पड़ता है। 100 दिनों से अधिक समय से किसान दिल्ली की सीमाओं पर बैठे हैं। किसान नेता अभी तक बोलते आ रहे थे कि यह आंदोलन राजनीती से दूर है। वही नेता इन दिनों बंगाल में ममता बनर्जी के समर्थन में वोट मांग रहे हैं।

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