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छात्र की आत्महत्या से शिक्षा विभाग सतर्क, अन्य छात्रों को बचाने के लिए तीन स्तरीय कमेटी गठन

जहां अभी तक शिक्षा का मंदिर कहे जाने वाले स्कूलों में पढ़ाई लिखाई से लेकर होनहार छात्रों का नाम जगमगाता था। वहीं अब आए दिन अजीबोगरीब मामलों के चलते स्कूल अपनी प्रसिद्धता और मुकाम से भटकता हुआ दिखाई दे रहा है।

पिछले दिनों सराय ख्वाजा के स्थित राजकीय विद्यालय के छात्र द्वारा छत से कूदकर आत्महत्या करने से जहां पूरे शिक्षा विभाग को आहात पहुंचा था, वही छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी स्कूल लाल घेरे में खड़ा हुआ प्रतीत हो रहा था।

इस सनसनी मचाने वाले घटना क्रम के बाद अब शिक्षा निदेशालय ने आवश्यक कदम उठाते हुए छात्रों की सुरक्षा पुख्ता करने के तीन स्तरीय कमेटी बनाने का फैसला किया गया है। दरअसल, अब कमेटी जिला, खंड एवं स्कूल स्तर पर काम करेगी।

इस संबंध में शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। यह कमेटी सुरक्षा के मानकों को पूरा कराने के साथ छात्रों की काउंसिलिग भी करेगी। 16 मार्च को फरीदाबाद के सराय ख्वाजा में हुई थी घटना

गौरतलब, 16 मार्च को राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में 11वीं कक्षा के छात्र की दूसरी मंजिल से कूदने से मृत्यु हो गई थी। इसके बाद शिक्षा विभाग की स्कूल भवन निर्माण शाखा के अधिकारियों ने स्कूल का निरीक्षण किया था। इस दौरान पाया गया था कि स्कूल के विभिन्न हिस्सों में कई ऐसे स्थान पाए गए थे, जहां से बच्चे आत्महत्या कर सकते हैं।

उस समय आनन फानन में उन जगहों की चहारदीवारी या अन्य उपकरणों से बंद कर दिया गया था। ऐसा हादसा दोबारा और किसी अन्य स्कूल में भी न हो, इसके लिए स्कूल स्तर, खंड एवं जिला स्तर पर कमेटी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। यह कमेटी समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण करेगी और अपनी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को सौंपेगी है। जिला स्तरीय कमेटी

जिला स्तरीय कमेटी में पुलिस आयुक्त, उपायुक्त या पुलिस अधीक्षक स्तर का एक अधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, संयुक्त आयुक्त नगर निगम, बीएंडआर का कार्यकारी अभियंता, आरटीए सचिव, डीटीपी, उपायुक्त द्वारा मनोनीत निजी स्कूल का प्रतिनिधि, बाल मनोचिकित्सक व मौलिक एवं जिला शिक्षा अधिकारी रहेंगे। यह कमेटी समय-समय पर स्कूल भवन की जांच करेगी और छात्रों की काउंसिलिग करेंगी।

सहायक पुलिस आयुक्त, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, आरटीए का प्रतिनिधि, एसडीएम द्वारा मनोनीत निजी विद्यालय का प्रतिनिधि, पैरेंट्स एसोसिएशन का प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह अपनी जांच रिपोर्ट जिला स्तरीय कमेटी को सौंपेंगे।

जिला शिक्षा अधिकारी रीतू चौधरी का कहना है कि अब शारीरिक शिक्षा के अध्यापक, स्कूल संयोजक और स्कूल सुरक्षा अधिकारी शामिल होगा। यह कमेटी छात्र की प्रत्येक गतिविधि पर निगरानी रखेगी। इसके अलावा छात्रों के लिए काउंसिलिग कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह कमेटी पहले से ही कार्य करती रही है। अब दोबारा से सक्रिय करने के निर्देश आए हैं। इसके अलावा जिन विद्यालयों में यह कमेटी नहीं है, उन्हें बनाने के निर्देश दिए हैं। यह कमेटी स्कूल सुरक्षा संबंधी निरीक्षण के अलावा स्कूल बसों का भी निरीक्षण करेगी।

बड़े दुख कि बात है जिस उम्र में छात्रों को अपनी प्रतिभा को निखारने का प्रयास करना चाहिए। वह आत्महत्या जैसे शर्मनाक स्थिति को दोहरा कर न सिर्फ अपने माता पिता को उम्रकैद जैसी सजा से रूबरू करा रहे है, बल्कि समाज में अन्य छात्रों के लिए भी एक गलत छवि प्रस्तुत कर रहे है। यह सब गलत है और समय रहते अपने बच्चों को समझना और समझाना बेहद जरूरी है।

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