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नगर निगम द्वारा गीले व सूखे कचरे को अलग – अलग कर एकोग्रीन कंपनी को देने की योजना शुरू

नगर निगम द्वारा पर्यावरण को स्वच्छ रखने की पूरी कोशिश की जा रही है। इसके लिए वार्ड 19 में गीले व सूखे कचरे को अलग-अलग करके देने की योजना शुरू की गई है। नगर निगम की ओर से इस योजना के तहत वार्ड वासियों को गीला व सूखा कचरा अलग अलग करके देना होगा।

यदि वार्डवासी ऐसा नहीं करते तो उन्हें ₹500 का जुर्माना देना पड़ सकता है। कूड़ा चाहे कैसा भी हो गीला या सूखा लोग उसे एक जगह एकत्रित करते रहते हैं व इकोग्रीन कंपनी को दे देते हैं। लेकिन अब गीले व सूखे कचरे को अलग – अलग करके देने कि योजना शुरू की गई है।

वार्ड 19 में यदि यह योजना सफल होती है तो अन्य वार्डों में भी इसकी शुरुआत की जाएगी। इस योजना की शुरुआत स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत की गई है। जिला उपायुक्त यशपाल यादव के दिशा निर्देशों पर यह योजना बनाई गई है जिसमें घरों से अलग-अलग कोरा एकत्रित किया जाएगा।

इसकी शुरुआत बृहस्पति वार से वार्ड 19 से की गई है। इस योजना के तहत गीले और सूखा कचरा अलग-अलग ना देने पर लोगों पर कार्यवाही भी की जाएगी।

इतना ही नहीं निगम के कूड़ा उठाने वाले वाहन को भी इस तरह से डिजाइन कराया जाएगा कि गीला और सूखा कचरा अलग अलग रखा। लोगों को मुफ्त कूड़ेदान भी इस योजना के तहत वितरित किए जाएंगे। यह कार्य पार्षदों की सहायता से किया जाएगा।

निगम की ओर से इको ग्रीन कंपनी द्वारा घर-घर जाकर कूड़ा उठाने का काम किया जाता है। स्वस्थ भारत मिशन के तहत ठोस कूड़ा प्रबंधन के नियमानुसार दो प्रकार से कूड़ा एकत्रित किया जाना चाहिए। लेकिन लोग गीले व सूखे कचरे को एक साथ मिलाकर इकोग्रीन कंपनी को दे देते हैं।

सभी लोगों के घरों में दो प्रकार का कूड़ा एकत्रित होता है, गीला और सूखा कूड़ा। सूखे कूड़े में कागज व पॉलीथिन सम्मिलित होते हैं। लेकिन लोग इस नियम का पालन ना करते उनकी ले वह सूखे कूड़े को एक साथ एकत्रित कर अपने कूड़ेदान में डाल देते हैं व इको ग्रीन कंपनी को दे देते हैं।

जबकि इंसान नहीं किया जाना चाहिए। अब यशपाल यादव के आदेश पर निगम के वार्डों में कोविद वेस्ट कचरा एकत्रित करने को कोवि़ड वेस्ट वाहन भी शुरू किए गए हैं।

कोरोना के मामलों को ध्यान में रखते हुए इको ग्रीन कंपनी के दो वाहन द्वारा अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर रोजाना करीब 100 किलोग्राम कोविड़ कचरा एकत्रित किया जा रहा है और इस कचरे को निस्तारण के लिए जसाना गांव के प्लांट पर पहुंचाया जाता है।

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