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कागजों में तो शौचमुक्त कर दिया साहब, क्या सच में हो पाएगा कभी शौचमुक्त फरीदाबाद

नगर निगम ने जून 2017 में शहर के सभी 40 वार्डों को शौचमुक्त बनाने का काम शुरू किया था वही जिला अब कागजी तौर पर शौच मुक्त हो भी गया है परंतु अभी भी लोगों को खुले में शौच करते हुए देखा जा सकता है।

दरअसल, केंद्रीय आवास एवं शहरी मंत्रालय ने बीते बुधवार को फरीदाबाद को ओडीएफ प्लस घोषित किया है यानी कि शहर में अब कोई भी खुले में शौच नहीं जाता। शहर के हर हिस्से में पर्याप्त टॉयलेट की व्यवस्था है यह दावा नगर निगम द्वारा किया गया जिस पर सर्वे के बाद केंद्र की टीम ने मुहर लगा दी है और ओडीएफ प्लस का सर्टिफिकेट दे दिया है परंतु अभी भी जिला शौच मुक्त नहीं हो पाया है।

कागजों में तो शौचमुक्त कर दिया साहब, क्या सच में हो पाएगा कभी शौचमुक्त फरीदाबाद
कागजों में तो शौचमुक्त कर दिया साहब, क्या सच में हो पाएगा कभी शौचमुक्त फरीदाबाद

लोग सड़कों पर ही लघुशंका करते हुए नजर आते हैं इतना ही नहीं लोगों ने मेट्रो पिर्लस को भी शौचालयों में तब्दील कर दिया है।‌ प्रशासन द्वारा शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं की गई है जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ता है।

मंडियों में नहीं है शौचालय की व्यवस्था
शहर के अंदर कई बड़ी मंडी आती हैं और प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोगों का आवागमन यहां से होता है परंतु यहां शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है। लोग सड़कों के किनारे ही शौच करते हुए नजर आते हैं।

कागजों में तो शौचमुक्त कर दिया साहब, क्या सच में हो पाएगा कभी शौचमुक्त फरीदाबाद
कागजों में तो शौचमुक्त कर दिया साहब, क्या सच में हो पाएगा कभी शौचमुक्त फरीदाबाद

बस स्टैंड पर भी नहीं है शौचालय की व्यवस्था
जिले के बस स्टैंड पर भी शौचालय की उचित व्यवस्था नहीं है। शौचालयों के अभाव में लोग सड़कों के किनारे ही शौच करने को मजबूर है।

क्या है ओडीएफ प्लस
ओडीएफ प्लस श्रेणी में उन क्षेत्रों को शामिल किया जाता है जहां शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था होती है। फरीदाबाद को भी पूरे 3 साल बाद इस श्रेणी में शामिल किया गया है। केंद्र की टीम ने शहर भर का सर्वे कर जिले को ओडीएफ प्लस में शामिल किया है।

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