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शाह-पवार की मुलाकात: बदलाव के संकेत या शिवसेना-कांग्रेस को संदेश, गृहमंत्री अमित शाह के जवाब से बढ़ा सस्पेंस

इन दिनों देश में बंगाल चुनाव और महाराष्ट्र की वसूली सरकार हर किसी की जुबान पर है। कार में बम प्लांट करने के विवाद से क्या महाराष्ट्र की राजनीति नया करवट लेगी? या फिर एनसीपी प्रमुख शरद पवार अपने सहयोगियों शिवसेना और कांग्रेस को कोई संदेश देना चाहते हैं? अहमदाबाद में पीएम मोदी के करीबी के घर गृहमंत्री अमित शाह और शरद पवार की मुलाकात के बाद इन सवालों के जवाब ढूंढे जा रहे हैं।

चौतरफा घिरी महाराष्ट्र सरकार किसी भी समय संकट में आ सकती है। हालांकि, भाजपा महाराष्ट्र की सियासत में बड़े बदलाव के प्रति आश्वस्त नहीं है। पवार अपने सियासी जीवन में किसी भी संभावनाओं को अपने पक्ष में करने के लिए ऐसे संदेश देते आए हैं।

शाह-पवार की मुलाकात: बदलाव के संकेत या शिवसेना-कांग्रेस को संदेश, गृहमंत्री अमित शाह के जवाब से बढ़ा सस्पेंस

इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है कि 100 करोड़ की उगाही-वसूली का लक्ष्य खुद ग्रहमंत्री दे। भाजपा में एक बड़े वर्ग का मानना है कि इस मुलाकात के जरिये दरअसल पवार अपने करीबी अनिल देशमुख पर हमलावर शिवसेना और कांग्रेस को संदेश देना चाहते हैं। पवार ने 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी ऐसा ही किया था।

sharad pawar amit shah

इस मुलाकात से अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। सरकार में अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए पवार भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में रहे थे। हालांकि अपने अनुकूल सब कुछ करा लेने के बाद पवार ने महा विकास अघाड़ी की सरकार बनवाई। पवार ने हमेशा ऐसी ही राजनीति की है। उन्होंने सभी दलों के बड़े नेताओं से करीबी संबंध बनाए रखा।

शाह-पवार की मुलाकात: बदलाव के संकेत या शिवसेना-कांग्रेस को संदेश, गृहमंत्री अमित शाह के जवाब से बढ़ा सस्पेंस

इस मुलाकात ने गठबंधन सरकार की दिक्कतें बढ़ा दी हैं। कांग्रेस की नींद उड़ा दी है। इस मीटिंग को शिवसेना और कांग्रेस को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा सकता है।

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