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इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का

प्रशासन के द्वारा शहर के विभिन्न भागों में बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। लेकिन उन झूलों को लगाने के बाद उनकी देखरेख भी प्रशासन के द्वारा ही की जाती है। जैसे की हम सभी जानते हैं कि झूले पार्क के अंदर लगाए जाते हैं और पार्क में ज्यादातर समय धूप रहती है।

उस धूप की वजह से वह प्लास्टिक वाले झूले जल्दी खराब हो जाते हैं या टूट जाते हैं। लेकिन उन झूलों की देख ले के द्वारा की जाती है। सेक्टर 12 टाउन पार्क में भी एच एस वी पी के द्वारा शहर के बच्चों के लिए झूले लगाए गए हैं। सेक्टर 12 स्टेडियम के सामने बने रास्ते से जब हम पार्क के अंदर जाएंगे।

इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का
इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का

वहां पर सीधे हाथ की और बच्चों के खेलने के लिए कई प्रकार के झूले लगे हुए हैं। जिनमें से कुछ झूले लोहे के हैं तो कुछ झूले प्लास्टिक के हैं। अगर हम उन झूलों की बात करें तो वह कई साल पहले लगाए गए थे। लेकिन उनकी देखरेख नहीं होने की वजह से झूले जगह-जगह से टूट गए हैं।

इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का
इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का

वहीं कई झूलों की लोहे की ग्रिल भी गल चुकी है। जिसकी वजह से पार्क में आने वाले बच्चों को टूटे हुए झूले पर ही ढूंढना पड़ता है। इस बारे में कई बार प्रशासन को भी अवगत कराया जा चुका है। लेकिन उसके बावजूद भी झूलों को ना तो रिपेयर किया जा रहा है और ना ही पुराने झूलों को बदलकर नए झूले लगाए जा रहे हैं।

इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का
इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का

बेंच भी पड़े हैं टूटे हुए

जहां एक ओर बच्चों के लिए लगाए गए झूले टूटे पड़े हैं। वहीं लोगों की सुविधा के लिए पार्क में जगह-जगह सीमेंटेड बैंक भी लगाए गए हैं। लेकिन वह सीमेंटेड बेंच भी टूटे पड़े हुए हैं। जिसकी वजह से वहां पार्क में आने वाले लोगों को टूटे हुए बेंच पर ही बैठना पड़ता है।

इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का
इस पार्क में टूटे पड़े हुए हैं झूले, कैसे लुफ्त ले बच्चे झूलों का

पार्क में करीब सैकड़ों की संख्या में बेंच लगे हुए हैं। लेकिन उन बेंच की देखरेख सही समय पर नहीं होने की वजह से आधे से ज्यादा बेंच टूट चुके हैं जिसकी वजह से वहां आने वाले लोगों को टूटे हुए बेंच पर भी बैठना पड़ता है

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